नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी और किराए पर लिए गए बैंक खातों, डेबिट कार्डों तथा मोबाइल सिम कार्डों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित कर रहा था। मामले में तीन आरोपियों—सोनू, यश कुमार और बलजिंदर सिंह उर्फ मंगा—को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी व्यापक हो सकता है और इसके पीछे कई अन्य संचालक भी सक्रिय हैं।
मामले की शुरुआत करोल बाग के प्रेम नगर निवासी एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित के मोबाइल फोन पर अचानक बैंक खाते से रकम कटने के कई अलर्ट संदेश आने लगे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पीड़ित के बेटे ने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाते को ब्लॉक कराया और साइबर अपराध इकाई को सूचना दी। हालांकि तब तक खाते से ₹4,82,476 की राशि विभिन्न डिजिटल लेन-देन के माध्यम से निकाली जा चुकी थी।
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शिकायत मिलते ही जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू की। बैंकिंग चैनलों और डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की मदद से लगभग ₹4 लाख की राशि समय रहते फ्रीज कर दी गई। अधिकारियों के अनुसार यदि सूचना देने में थोड़ी भी देरी होती तो पूरी रकम आरोपियों तक पहुंच सकती थी। इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, वित्तीय ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों की विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह कई स्तरों पर काम करता था। आरोप है कि नेटवर्क का एक हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। बाद में उनसे पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज खरीद लिए जाते थे। ऐसे खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को विभिन्न राज्यों में स्थानांतरित करने और वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। साइबर अपराध की भाषा में इन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
डिजिटल ट्रेल की जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि ठगी की राशि का एक हिस्सा उत्तम नगर निवासी सोनू के खाते तक पहुंचा था। इसके बाद की गई कार्रवाई में सोनू को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान उसके सहयोगी यश कुमार की भूमिका सामने आई, जिसे भी हिरासत में लिया गया। जांच आगे बढ़ने पर हरियाणा निवासी बलजिंदर सिंह उर्फ मंगा का नाम सामने आया, जिसे इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण संचालक माना जा रहा है। बाद में उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार यश कुमार कथित तौर पर बैंक खातों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करने और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्क के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता था। वहीं बलजिंदर सिंह उर्फ मंगा बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर साइबर ठगी के पैसों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाता था। वह अलग-अलग राज्यों में बैठकर खातों के जरिए रकम ट्रांसफर कराता और एटीएम के माध्यम से नकदी निकलवाने की व्यवस्था करता था।
तलाशी अभियान के दौरान आरोपियों के कब्जे से 28 डेबिट कार्ड, 12 सिम कार्ड और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। बरामद उपकरणों और दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका संबंध देशभर में दर्ज अन्य साइबर अपराध मामलों से है या नहीं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के साथ भी इन खातों और मोबाइल नंबरों का मिलान किया जा रहा है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी केवल पीड़ितों को ही निशाना नहीं बना रहे, बल्कि बैंक खातों, मोबाइल सिम और डिजिटल पहचान का समानांतर नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार सोशल इंजीनियरिंग, म्यूल अकाउंट्स और फर्जी बैंकिंग गतिविधियां आज साइबर अपराधियों के सबसे प्रभावी हथियार बन चुके हैं। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, डेबिट कार्ड या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति के उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं।
अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आगे की पड़ताल में इस साइबर सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क, संचालन तंत्र और इसके पीछे मौजूद बड़े मास्टरमाइंड से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
