गुजरात में ऑपरेशन ‘डेल्टा हंट’ के तहत अवैध रूप से रह रहे 424 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की जांच तेज

ऑपरेशन ‘डेल्टा हंट’ में बड़ा एक्शन: गुजरात में अवैध रूप से रह रहे 424 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए

Team The420
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गांधीनगर। गुजरात में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक अभियान शुरू किया है। “ऑपरेशन डेल्टा हंट” नामक इस विशेष कार्रवाई के तहत गुजरात पुलिस ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी और सत्यापन अभियान चलाकर बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों की पहचान की है। अभियान के शुरुआती चरण में 424 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है, जबकि 782 से अधिक अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है।

राज्य सरकार के अनुसार यह अभियान उन लोगों के खिलाफ शुरू किया गया है जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर गुजरात के विभिन्न शहरों में रह रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अवैध प्रवास के मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर भी की जा रही है। इसी कारण पुलिस और खुफिया इकाइयों को संयुक्त रूप से जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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गांधीनगर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य के गृह विभाग की ओर से बताया गया कि अभियान के तहत तकनीकी निगरानी, स्थानीय खुफिया सूचनाओं और दस्तावेज सत्यापन की मदद ली जा रही है। विभिन्न जिलों में पुलिस टीमों ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है जहां बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिक, किरायेदार या अस्थायी रूप से रहने वाले लोग मौजूद हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार कई संदिग्ध व्यक्तियों के पास ऐसे पहचान पत्र और दस्तावेज पाए गए हैं जिनकी वैधता की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इन लोगों को फर्जी पहचान पत्र, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। इसी कारण अब जांच का दायरा केवल अवैध रूप से रह रहे लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन स्थानीय एजेंटों और सहयोगियों तक भी बढ़ाया गया है जिन्होंने कथित रूप से उन्हें रहने, काम करने या दस्तावेज हासिल करने में मदद की।

अभियान के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई शुरू होने के बाद कुछ संदिग्ध व्यक्ति राज्य छोड़कर भागने का प्रयास कर रहे थे। ऐसे लगभग 18 लोगों को भी सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया। इससे जांच एजेंसियों को यह संकेत मिला है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों के बीच अभियान की जानकारी फैल चुकी थी और कुछ लोग गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में संदिग्ध व्यक्तियों के निवास स्थान, रोजगार संबंधी रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे कितने समय से राज्य में रह रहे थे, किन लोगों के संपर्क में थे और उनकी आजीविका के स्रोत क्या थे। इसके साथ ही किरायेदार सत्यापन और श्रमिक पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में बसने की घटनाएं लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय बिचौलियों और दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की भूमिका अक्सर सामने आती रही है। इसी वजह से गुजरात पुलिस इस अभियान में मानव खुफिया तंत्र के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी विश्लेषण का भी उपयोग कर रही है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की नागरिकता और दस्तावेजों की जांच में अवैध स्थिति सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नियमानुसार निर्वासन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति, संस्था या नियोक्ता की भूमिका अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने में पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

राज्यभर में चल रहा यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियां अब उन नेटवर्कों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं जो कथित रूप से अवैध प्रवासियों को पहचान छिपाने, रोजगार दिलाने और स्थानीय स्तर पर बसाने में सहायता करते रहे हैं। गुजरात में चल रहा यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवास से जुड़े मुद्दों पर देशभर का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

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