नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कार्यालय से जुड़े बहुचर्चित यौन उत्पीड़न और कथित धर्म परिवर्तन मामले में दाखिल चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले दावों को सामने ला दिया है। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ महिलाओं को सुनियोजित तरीके से मानसिक रूप से प्रभावित करने, धार्मिक विचारधारा की ओर मोड़ने और व्यक्तिगत परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश की गई।
चार्जशीट में शामिल एक पीड़िता के बयान के मुताबिक, उसे मानसिक तनाव कम करने के नाम पर धीरे-धीरे धार्मिक सामग्री सुनने और देखने के लिए प्रेरित किया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे इस्लाम से जुड़े कई वीडियो देखने और कुछ प्रमुख धार्मिक उपदेशकों के भाषण सुनने के लिए कहा गया। उसके अनुसार, लगातार यह समझाने का प्रयास किया गया कि धर्म परिवर्तन करने से उसकी मानसिक परेशानियां कम हो सकती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
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दस्तावेजों में दर्ज बयान के अनुसार, पीड़िता ने कहा कि शुरुआत में उसे यह सब तनाव कम करने की सलाह के रूप में बताया गया, लेकिन समय के साथ बातचीत का केंद्र धार्मिक मान्यताओं और धार्मिक प्रथाओं की ओर बढ़ता गया। उसने आरोप लगाया कि उसे मंदिर जाने और धार्मिक भजन सुनने से दूरी बनाने की सलाह दी गई तथा कुछ विशेष धार्मिक प्रार्थनाएं और धार्मिक शब्दों का नियमित रूप से उच्चारण करने के लिए कहा गया।
चार्जशीट के अनुसार, एक आरोपी ने कथित तौर पर विवाह का आश्वासन देकर महिला के साथ संबंध बनाए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने अपने भविष्य और परिवार की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता जताई, तब उसे भरोसा दिलाया गया कि उसे डरने की जरूरत नहीं है और धार्मिक मार्ग अपनाने से उसकी समस्याएं कम हो जाएंगी। महिला का दावा है कि लगातार समझाने और प्रभाव डालने की प्रक्रिया के कारण वह धीरे-धीरे इन बातों पर विश्वास करने लगी थी।
जांच दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि पीड़िता को धार्मिक कथाओं, धार्मिक त्योहारों, स्वर्ग-नरक जैसी अवधारणाओं और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती थी। उसके बयान के मुताबिक, उसे मोबाइल फोन पर कुछ धार्मिक उपदेशकों के वीडियो खोजकर देखने और उनके भाषण सुनने के लिए भी कहा गया था।
मामले में आर्थिक पहलू भी सामने आया है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपियों को उसके बैंक खातों, डिजिटल भुगतान माध्यमों और वित्तीय स्थिति की विस्तृत जानकारी थी। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या इस जानकारी का किसी प्रकार से दबाव या प्रभाव बनाने के लिए उपयोग किया गया था।
चार्जशीट में पीड़िता की मां का बयान भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के व्यवहार और जीवनशैली में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दिए। परिवार के अनुसार, पहनावे, खानपान और दैनिक गतिविधियों में परिवर्तन के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी उसके विचार बदलते नजर आए। मां का दावा है कि उनकी बेटी ने परिवार को बताया था कि उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और परिवार के अन्य सदस्यों को भी धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच के दौरान कई महिला कर्मचारियों ने शोषण, मानसिक प्रताड़ना, धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने के प्रयास, जबरन धार्मिक प्रथाएं अपनाने के दबाव और उत्पीड़न जैसे आरोप लगाए। इस पूरे प्रकरण में अलग-अलग थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इनमें शिकायतकर्ता, उसके परिजन, कंपनी के कर्मचारी, प्रबंधन से जुड़े लोग, आंतरिक शिकायत समिति के सदस्य और जांच से जुड़े अन्य व्यक्तियों के बयान शामिल हैं। दूसरी ओर, TCS ने दोहराया है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या दबाव के प्रति शून्य-सहनशीलता की नीति अपनाती है। कंपनी ने कहा है कि आरोपों के दायरे में आए कर्मचारियों के खिलाफ आंतरिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है और संबंधित कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। मामले की सुनवाई और आगे की जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
