चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर कथित “कैश फॉर जॉब्स” घोटाले को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य के नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग (MAWS) में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया है कि विभाग में नियुक्तियों के बदले बड़े पैमाने पर रिश्वत ली गई और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने जानकारी दी कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी राय के आधार पर मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल भर्ती अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रभाव के इस्तेमाल के आरोप भी शामिल हैं।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले अपनी जांच के दौरान दावा किया था कि नगर प्रशासन विभाग में विभिन्न पदों पर की गई नियुक्तियों के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। एजेंसी के अनुसार, विभाग में 2,538 पदों पर हुई भर्तियों में कम से कम कुछ नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली गई। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ पदों के लिए ₹25 लाख से ₹35 लाख तक की रिश्वत ली गई।
ED द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए दस्तावेजों में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान रिश्वत के रूप में सैकड़ों करोड़ रुपये एकत्र किए गए। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियां लगभग ₹634 करोड़ की कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। कुछ रिपोर्टों में भर्ती, ठेका आवंटन और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े भ्रष्टाचार का कुल दायरा इससे भी अधिक होने का दावा किया गया है।
मामले की शुरुआत तब तेज हुई जब केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जुटाए गए दस्तावेज और कथित साक्ष्य राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी को भेजे गए। शुरुआती स्तर पर मामला दर्ज नहीं होने के बाद यह विवाद अदालत तक पहुंचा। बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री को संज्ञेय अपराध की जांच के लिए पर्याप्त मानते हुए कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा था कि प्रस्तुत दस्तावेज केवल शिकायत नहीं बल्कि ऐसे रिकॉर्ड हैं जिनमें गंभीर आरोपों की जांच की जरूरत दिखाई देती है।
विपक्षी दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता से समझौता किया गया और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हुए। विपक्ष का दावा है कि यदि रिश्वत लेकर नियुक्तियां दी गईं, तो इससे हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा होगा। हालांकि इन आरोपों को अभी अदालत या जांच एजेंसियों द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, के.एन. नेहरू लगातार सभी आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की गई थी और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
अब FIR दर्ज होने के बाद जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार और कथित धनशोधन के पहलुओं की भी अलग-अलग स्तर पर जांच की जा सकती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला भ्रष्टाचार, सरकारी भर्ती व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस का केंद्र बन गया है।
