लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानव तस्करी के एक ऐसे संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने नाबालिग लड़कियों को कथित तौर पर शादी के नाम पर बेचने का धंधा बना रखा था। जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक सहारे से वंचित लड़कियों को बहला-फुसलाकर राजस्थान भेजने की तैयारी की जाती थी, जहां उनके बदले लाखों रुपये का सौदा तय किया जाता था। मामले में तीन आरोपियों और एक किशोर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि राजस्थान में सक्रिय बताए जा रहे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
मामले का खुलासा मोहनलालगंज क्षेत्र से दो नाबालिग बहनों के लापता होने की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उनकी 16 वर्षीय और 12 वर्षीय नातिन अचानक घर से गायब हो गई थीं। परिवार को आशंका थी कि किसी ने उन्हें बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। शुरुआती जांच में यह भी पता चला कि बच्चियों को बेहतर जीवन और उनकी अलग रह रही मां से मिलाने का भरोसा दिया गया था।
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नाबालिगों के गायब होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की गई। तकनीकी निगरानी, स्थानीय सूचनाओं और बड़ी संख्या में सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने बच्चियों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया। मोबाइल फोन बंद होने के बावजूद जांच टीमों ने उनके संभावित मार्ग और संपर्कों को खंगाला। लगातार प्रयासों के बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
बरामदगी के बाद दर्ज किए गए बयानों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। जांच में संकेत मिले कि दोनों बच्चियों को राजस्थान ले जाकर कथित तौर पर पैसों के बदले विवाह कराने की तैयारी थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनूराग यादव, मोहम्मद अख्तर और प्रिया पटेल उर्फ शीला को गिरफ्तार कर लिया। मामले में एक किशोर को भी पकड़ा गया है, जिसकी भूमिका की अलग से जांच की जा रही है।
पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है। आरोपियों ने कथित तौर पर उन परिवारों को निशाना बनाया जहां लड़कियां आर्थिक तंगी, पारिवारिक विघटन या सामाजिक असुरक्षा की स्थिति में थीं। उन्हें नौकरी, घूमने-फिरने, बेहतर भविष्य, उपहार या परिवार से मिलाने जैसे झूठे वादों के जरिए अपने साथ ले जाया जाता था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा मामले में बच्चियों को पहले रायबरेली ले जाया गया। वहां उन्हें नए कपड़े दिए गए और उनकी तस्वीरें खींची गईं। बाद में ये तस्वीरें राजस्थान में मौजूद नेटवर्क के कथित सदस्यों को भेजी गईं। तस्वीरों के आधार पर लड़कियों को “स्वीकृति” मिलने के बाद उनके बदले रकम तय की जाती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक लड़की के लिए करीब ₹1.5 लाख तक की राशि ली जाती थी।
पुलिस को संदेह है कि राजस्थान के कोटा क्षेत्र में इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ियां मौजूद हैं। जांच में कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जिनकी भूमिका कथित विवाह तय कराने और सौदे को अंतिम रूप देने में बताई जा रही है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जांच के दौरान पुराने संदिग्ध मामलों की जानकारी भी सामने आई। अधिकारियों को आशंका है कि रायबरेली की दो बहनों समेत कई अन्य लड़कियां भी इसी नेटवर्क के माध्यम से दूसरे राज्यों में भेजी गई हो सकती हैं। अब जांच एजेंसियां पुराने रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और संपर्क सूत्रों की मदद से संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हैं।
आरोपियों के कब्जे से ऐसे वाहन भी जब्त किए गए हैं जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर लड़कियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किया जाता था। मोबाइल चैट, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाया जा सके।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि मानव तस्करी के ऐसे गिरोह अक्सर सामाजिक और भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। उनके अनुसार, अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर पीड़ितों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। उन्होंने परिवारों से बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने और किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव की तुरंत सूचना देने की अपील की है।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
