FPI निवेशक को वॉलंटरी रिटेंशन रूट के तहत तय अवधि से पहले धन वापसी की अनुमति देने के मामले में SEBI ने ICICI बैंक को चेतावनी पत्र जारी किया।

FPI नियम उल्लंघन मामले में ICICI बैंक को SEBI की चेतावनी, बैंक बोला—कारोबार पर नहीं पड़ेगा कोई असर

Team The420
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मुंबई। देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल ICICI बैंक को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) से जुड़े एक मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से चेतावनी पत्र प्राप्त हुआ है। नियामक ने बैंक की कस्टोडियन सेवाओं की समीक्षा के दौरान कथित नियम उल्लंघन पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की है। हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस मामले का उसकी वित्तीय स्थिति, परिचालन गतिविधियों या कारोबारी प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बैंक द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, SEBI ने 1 जून 2026 को चेतावनी पत्र जारी किया था, जो बैंक को 2 जून को प्राप्त हुआ। यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब ICICI बैंक एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के लिए कस्टोडियन की भूमिका निभा रहा था। संबंधित निवेशक भारत के वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) ढांचे के तहत निवेश कर रहा था।

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SEBI का आरोप है कि बैंक ने संबंधित FPI को निर्धारित प्रतिबद्ध निवेश अवधि पूरी होने से पहले ही अपनी राशि वापस भेजने की अनुमति दे दी। नियामक के अनुसार यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर बैंक के खिलाफ चेतावनी जारी की गई है।

नियामक ने कहा कि यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और SEBI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) विनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ी है। हालांकि फिलहाल इस मामले में किसी वित्तीय दंड की घोषणा नहीं की गई है। SEBI ने इसे एक अनुपालन संबंधी चूक के रूप में दर्ज किया है, न कि किसी वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी के मामले के रूप में।

अपने जवाब में ICICI बैंक ने कहा कि मामला सीमित दायरे का है और इससे बैंक के मुख्य बैंकिंग कारोबार, ग्राहक सेवाओं या वित्तीय स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंक ने यह भी स्वीकार किया कि चेतावनी पत्र से संबंधित जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इसके पीछे आंतरिक स्तर पर हुई अनजानी देरी को कारण बताया गया है।

बैंक प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए आंतरिक प्रक्रियाओं और अनुपालन व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल प्रक्रियागत प्रकृति का है और इससे उसके कॉर्पोरेट गवर्नेंस या संचालन प्रणाली पर व्यापक सवाल नहीं उठते।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह मामला बैंक की कमाई या कारोबारी संभावनाओं को सीधे प्रभावित करने वाला न हो, लेकिन सूचीबद्ध वित्तीय संस्थानों के लिए नियामकीय अनुपालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। बैंकिंग क्षेत्र में छोटी प्रक्रियागत चूक भी नियामकीय जांच और निवेशकों की चिंता का कारण बन सकती है।

इस बीच बैंक का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। हाल ही में घोषित चौथी तिमाही के नतीजों में ICICI बैंक ने ₹13,701.7 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.5 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा बाजार की कई अपेक्षाओं से बेहतर रहा।

बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) बढ़कर ₹22,979.2 करोड़ पर पहुंच गई। वहीं परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) अनुपात घटकर 0.33 प्रतिशत रह गया, जबकि सकल NPA अनुपात में भी कमी दर्ज की गई।

कुल अग्रिम बढ़कर ₹15.53 लाख करोड़ तक पहुंच गए, जो ऋण मांग में मजबूत वृद्धि को दर्शाते हैं। इसके अलावा प्रावधानों में कमी आने से बैंक की बैलेंस शीट और लाभप्रदता संकेतकों में भी सुधार हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल SEBI की चेतावनी को एक अनुपालन संबंधी मुद्दे के रूप में देख रहे हैं, न कि बैंक की वित्तीय मजबूती पर गंभीर सवाल के रूप में। यही कारण है कि गुरुवार को कारोबार समाप्त होने पर ICICI बैंक का शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। बीएसई पर बैंक का शेयर ₹1,252.30 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 0.80 प्रतिशत अधिक था।

फिलहाल निवेशकों और बाजार सहभागियों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक नियामकीय अनुपालन को और मजबूत बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाता है। मौजूदा संकेत बताते हैं कि मामला मुख्य रूप से प्रक्रियागत अनुपालन से जुड़ा है और बैंक का वित्तीय प्रदर्शन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।

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