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विप्रो के पुणे कार्यालय में धार्मिक उत्पीड़न का आरोप, पूर्व महिला प्रोजेक्ट मैनेजर की शिकायत से मचा बवाल

Team The420
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पुणे। देश के आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Wipro के पुणे कार्यालय से सामने आए एक विवाद ने कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कंपनी की एक पूर्व महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर धार्मिक उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि विप्रो ने भी आंतरिक स्तर पर मामले की समीक्षा किए जाने की बात कही है।

मामला तब चर्चा में आया जब पूर्व कर्मचारी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ-साथ मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि पुणे के हिंजवड़ी स्थित विप्रो कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और टीम लीडरों ने उनके धार्मिक विश्वासों को लेकर लगातार दबाव बनाया और उन्हें एक विशेष धर्म की मान्यताओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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शिकायतकर्ता के अनुसार, शुरुआत में यह दबाव सामान्य बातचीत और सलाह के रूप में दिखाई दिया, लेकिन समय के साथ स्थिति अधिक गंभीर होती चली गई। महिला का आरोप है कि जब उन्होंने ऐसे प्रयासों का विरोध किया तो उनके प्रति कार्यालय का रवैया बदल गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। उन्होंने दावा किया कि उनके धार्मिक विश्वासों को लेकर बार-बार टिप्पणियां की गईं और कार्यस्थल का माहौल उनके लिए असहज बना दिया गया।

महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उन्हें खराब परफॉर्मेंस रिव्यू देने की चेतावनी दी गई। इसके अलावा नौकरी पर संकट खड़ा करने और संगठन में उनकी पेशेवर स्थिति कमजोर करने जैसी धमकियां भी दी गईं। लगातार बढ़ते तनाव और कथित प्रताड़ना के कारण अंततः उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2019 से 2025 तक विप्रो में कार्य किया और इसी दौरान उन्हें कथित रूप से कई बार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा।

मामले में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने कंपनी की आंतरिक शिकायत प्रणाली का भी सहारा लिया था। हालांकि उनका आरोप है कि वहां से उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने कानूनी और प्रशासनिक संस्थाओं का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। शिकायत सार्वजनिक होने के बाद मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया और आईटी उद्योग में कार्यस्थल की संस्कृति को लेकर बहस शुरू हो गई।

पुलिस के अनुसार, महिला द्वारा दिए गए आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। शिकायत में एक वरिष्ठ महिला अधिकारी का भी उल्लेख किया गया है, जिनके खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने और इस्तीफा देने का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब शिकायतकर्ता के बयान, उपलब्ध दस्तावेजों और कंपनी के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि शिकायत के संबंध में विप्रो के आंतरिक तंत्र ने क्या कार्रवाई की थी और क्या कंपनी की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। पुलिस संबंधित अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके।

इस बीच विप्रो ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा है कि कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी का कहना है कि किसी भी प्रकार के भेदभाव, उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार के प्रति उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और मामले में पुलिस को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच जारी होने के कारण वह फिलहाल आरोपों के विशिष्ट पहलुओं पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं कर सकती।

मामले ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि हाल के महीनों में महाराष्ट्र के एक अन्य आईटी कार्यालय से भी धार्मिक उत्पीड़न से जुड़े आरोप सामने आए थे। ऐसे मामलों ने कॉरपोरेट जगत में विविधता, धार्मिक स्वतंत्रता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संभावित कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, आईटी उद्योग की निगाहें अब इस मामले की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।

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