लखनऊ में संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय फर्जी टेक सपोर्ट कॉल सेंटर अमेरिकी नागरिकों को नकली वायरस अलर्ट के जरिए निशाना बना रहा था।

जर्मन भाषा सर्टिफिकेट का झांसा, बिना परीक्षा पास कराने का वादा: बेंगलुरु की नर्स से ₹36.7 लाख की साइबर ठगी

Team The420
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विदेश में बेहतर करियर और आकर्षक वेतन का सपना दिखाकर एक नर्स से ₹36.7 लाख की कथित ठगी कर ली गई। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने जर्मन भाषा का प्रमाणपत्र बिना परीक्षा दिए उपलब्ध कराने और जर्मनी में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पीड़िता को अपने जाल में फंसाया। लंबे समय तक आश्वासन और विभिन्न शुल्कों की मांग के बाद जब न तो प्रमाणपत्र मिला और न ही नौकरी, तब पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

जानकारी के अनुसार पीड़िता पेशे से नर्स है और विदेश में रोजगार के अवसर तलाश रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई जिन्होंने दावा किया कि उनके पास जर्मन भाषा प्रमाणन और विदेश प्लेसमेंट की विशेष व्यवस्था है। आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि सामान्य प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी और आवश्यक प्रमाणपत्र सीधे उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिससे जर्मनी में नौकरी हासिल करना आसान हो जाएगा।

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शुरुआत में पीड़िता को भरोसा दिलाने के लिए पूरी प्रक्रिया को बेहद पेशेवर तरीके से प्रस्तुत किया गया। कथित एजेंटों ने विभिन्न दस्तावेज, पंजीकरण प्रक्रिया और नौकरी से संबंधित औपचारिकताओं का हवाला देते हुए कई प्रकार के शुल्क मांगे। बताया जाता है कि हर चरण पर नए कारणों से अतिरिक्त भुगतान की मांग की जाती रही। कभी प्रोसेसिंग फीस, कभी प्रमाणन शुल्क और कभी विदेशी नियुक्ति से जुड़ी औपचारिकताओं के नाम पर रकम जमा कराई गई। पीड़िता ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में मांगी गई राशि का भुगतान करना जारी रखा।

समय बीतने के साथ भुगतान की कुल राशि बढ़कर ₹36.7 लाख तक पहुंच गई। इसके बावजूद न तो जर्मन भाषा का वादा किया गया प्रमाणपत्र मिला और न ही विदेश में नौकरी से जुड़ी कोई ठोस प्रगति दिखाई दी। जब पीड़िता ने बार-बार जवाब मांगना शुरू किया तो कथित तौर पर आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। बाद में संपर्क सीमित होता गया और अंततः संचार लगभग बंद हो गया। इसी के बाद पीड़िता को संदेह हुआ कि उसके साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की गई है।

मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध जांच से जुड़े अधिकारियों ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। जांचकर्ताओं का ध्यान अब उन बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और संचार माध्यमों पर है जिनके जरिए धनराशि का आदान-प्रदान हुआ। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इसी तरह के झांसे में अन्य लोग भी फंसे हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में नौकरी, भाषा प्रमाणन, वीजा मंजूरी और पेशेवर लाइसेंसिंग जैसे क्षेत्रों में साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। वे अक्सर ऐसे उम्मीदवारों को निशाना बनाते हैं जो जल्दी रोजगार पाने या लंबी प्रक्रियाओं से बचने की कोशिश करते हैं। आकर्षक वेतन, त्वरित नियुक्ति और बिना परीक्षा प्रमाणपत्र जैसे दावे लोगों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन ऐसे प्रस्तावों की स्वतंत्र रूप से जांच करना बेहद जरूरी है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। वे पहले विश्वास पैदा करते हैं, फिर चरणबद्ध तरीके से धनराशि मांगते हैं और पीड़ित को यह महसूस कराते हैं कि वह किसी वैध प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी नौकरी, प्रशिक्षण या प्रमाणपत्र से संबंधित प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले संबंधित संस्थान की वैधता, आधिकारिक वेबसाइट, लाइसेंस और प्रमाणन व्यवस्था की पूरी जांच करनी चाहिए।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना परीक्षा प्रमाणपत्र, गारंटीड विदेशी नौकरी या असामान्य रूप से आसान चयन प्रक्रिया जैसे दावों से सतर्क रहें। यदि कोई संस्था या व्यक्ति लगातार अलग-अलग शुल्क मांग रहा हो और उसके दावों का स्वतंत्र सत्यापन संभव न हो, तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारी धनराशि के प्रवाह तथा कथित आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं।

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