नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) घी मिलावट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को देश के छह राज्यों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार इस कार्रवाई के दौरान ₹60 लाख नकद बरामद किए गए हैं, जबकि जांच में ₹45 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियों में कथित अवैध धन निवेश किए जाने के संकेत भी मिले हैं। ED का कहना है कि मामले से जुड़े आरोपियों और उनके परिवारों के नाम पर कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिनकी जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में की गई। छापेमारी महाराष्ट्र के अहिल्यानगर और मुंबई, राजस्थान के बीकानेर, उत्तराखंड के देहरादून और रुड़की, तमिलनाडु के डिंडीगुल, आंध्र प्रदेश के गुंटूर तथा दिल्ली स्थित विभिन्न परिसरों पर हुई। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने दिनभर चले तलाशी अभियान के दौरान दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में लिया।
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ED के हैदराबाद जोनल कार्यालय द्वारा संचालित इस अभियान में कई प्रमुख व्यक्तियों और कारोबारी प्रतिष्ठानों के आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों की तलाशी ली गई। इसके अलावा डिंडीगुल स्थित एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड, अहिल्यानगर स्थित मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और रुड़की स्थित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड के डेयरी संयंत्र भी जांच के दायरे में रहे।
जांच एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान ऐसे कई दस्तावेज बरामद हुए हैं जो कथित तौर पर फर्जी खरीद-बिक्री लेनदेन, वित्तीय हेरफेर और धन के स्रोत को छिपाने के लिए बनाई गई जटिल कारोबारी संरचना की ओर संकेत करते हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कई कानूनी संस्थाओं और व्यावसायिक इकाइयों का उपयोग धन के प्रवाह को छिपाने और कथित अपराध से अर्जित आय को वैध दिखाने के लिए किया गया।
मामले की जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है। यह जांच एक प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने कथित रूप से TTD से जुड़े कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और मिलावटी घी की आपूर्ति कर संस्था को वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
ED का दावा है कि अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि मिलावटी घी की आपूर्ति से प्राप्त कथित अवैध आय को बाद में विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में कई कंपनियों और व्यावसायिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। जांचकर्ताओं का मानना है कि धन के लेनदेन और निवेश को इस प्रकार संरचित किया गया था कि उसकी वास्तविक उत्पत्ति का पता लगाना कठिन हो जाए।
मामले ने इसलिए भी गंभीरता हासिल की है क्योंकि यह देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। इसी कारण जांच एजेंसियां वित्तीय पहलुओं के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला और व्यावसायिक लेनदेन की भी गहन जांच कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला केवल मिलावट या धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धन शोधन और अवैध वित्तीय नेटवर्क के बड़े पहलुओं को भी उजागर कर सकता है। जांच एजेंसियां अब बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि कथित अपराध से जुड़े धन के पूरे प्रवाह का पता लगाया जा सके।
फिलहाल ED की कार्रवाई के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है। एजेंसी का कहना है कि छापेमारी के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जांच का अगला चरण कथित अवैध धन के स्रोत, उसके निवेश और उससे जुड़े अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान पर केंद्रित रहेगा।
