चंडीगढ़। कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े कथित घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित रूप से अपराध की आय (Proceeds of Crime) का उपयोग लग्जरी गाड़ियां और अचल संपत्तियां खरीदने में किया, जिन्हें बाद में जांच सामने आने से पहले ही बेच दिया गया।
विशेष PMLA अदालत, पंचकूला में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट और ब्रांच मैनेजर पुष्पिंदर सिंह ने 2020 से 2023 के बीच सह-आरोपियों के माध्यम से लगभग ₹33 करोड़ प्राप्त किए। ED का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल BMW 7 सीरीज, महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-N और एक मोटरसाइकिल सहित कई लग्जरी वाहनों की खरीद तथा रियल एस्टेट निवेश में किया गया।
एजेंसी के अनुसार, ये सभी संपत्तियां मार्च 2026 से पहले ही बेच दी गईं, जब कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच एजेंसी का दावा है कि यह कदम धन के स्रोत को छिपाने और उसे जांच के दायरे से बाहर करने की कोशिश का हिस्सा था।
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यह मामला मार्च 2026 में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ, जिसके बाद ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की। जांच में सामने आया है कि पंचकूला नगर निगम के बैंक खातों को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोला और संचालित किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन का कथित दुरुपयोग हुआ।
ED के मुताबिक, इन खातों से लगभग ₹88.17 करोड़ राजत दहिया, ₹31.58 करोड़ स्वाति तोमर, ₹2.36 करोड़ कपिल कुमार और ₹1.41 करोड़ विनोद कुमार सहित अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए। एजेंसी का कहना है कि यह पूरा लेनदेन एक संगठित नेटवर्क के तहत किया गया, जिसमें अकॉमोडेशन एंट्री और नियंत्रित बैंक खातों का उपयोग हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि कई व्यक्तियों को कथित रूप से झूठे बहानों पर बैंक खाते खोलने के लिए प्रेरित किया गया और फिर उनसे खाली चेक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड लेकर लेनदेन को नियंत्रित किया गया। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन रजत दहिया जैसे मध्यस्थों के जरिए किया गया, जो धन के प्रवाह को आगे-पीछे करने में अहम भूमिका निभाते थे।
ED ने अदालत को यह भी बताया कि व्हाट्सएप मैसेज के जरिए लेनदेन के निर्देश दिए जाते थे और डिजिटल संचार इस कथित योजना का अहम हिस्सा था। कुछ मोबाइल उपकरणों को मार्च 2026 में नष्ट किए जाने की भी बात सामने आई है, जिससे साक्ष्य मिटाने का संदेह जताया गया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि नगर निगम के बैंक खातों के संचालन में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इससे बैंकिंग प्रणाली में निगरानी और अनुपालन (compliance) पर गंभीर सवाल उठे हैं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि PMLA की प्रक्रिया का पालन सही तरीके से नहीं किया गया और आरोपी की तत्काल रिहाई की मांग की। हालांकि अदालत ने आरोपी पुष्पिंदर सिंह को 9 जून तक ED की हिरासत में भेज दिया।
आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में धन को कई परतों में घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जाता है, जिससे जांच काफी जटिल हो जाती है। फिलहाल ED डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रेल और संपत्ति दस्तावेजों की जांच कर रही है।
एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां तथा संपत्ति जब्ती हो सकती है। मामला अभी भी जांच के अधीन है।
