सोनौली (महराजगंज)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर संचालित एक कथित ठगी रैकेट का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 453 नेपाली नागरिकों को हिरासत में लेकर नेपाल पुलिस के हवाले कर दिया गया। यह कार्रवाई नेपाली दूतावास, नई दिल्ली से मिली शिकायत के बाद कुशीनगर पुलिस द्वारा की गई, जिसने पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल मूल के युवक-युवतियों को नौकरी और बेहतर आय का लालच देकर चेन नेटवर्क मार्केटिंग से जोड़ा जा रहा था। आरोप है कि इस प्रणाली के जरिए उन्हें कथित ऑनलाइन ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों में शामिल कराया जा रहा था। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि कई लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध इस नेटवर्क में फंसाया गया और कुछ को अवैध रूप से बंधक बनाकर भी रखा गया।
मामला तब गंभीर हुआ जब नेपाल दूतावास को कुशीनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों के इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने की सूचना मिली। इसके बाद दूतावास ने भारतीय प्रशासन से संपर्क कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की और बड़े स्तर पर अभियान चलाया।
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कुशीनगर के कसया क्षेत्र में संचालित संदिग्ध नेटवर्क मार्केटिंग केंद्रों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कई स्थानों से नेपाली नागरिकों को हिरासत में लिया। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन लोगों को कथित रूप से नौकरी का झांसा देकर यहां लाया गया था और फिर उन्हें विभिन्न प्रकार की चेन मार्केटिंग गतिविधियों में लगाया जा रहा था।
पुलिस ने कार्रवाई के तहत कुल 11 वाहनों की सहायता से 453 नेपाली नागरिकों को सोनौली सीमा तक पहुंचाया। यहां उन्हें औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेपाल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। यह पूरी कार्रवाई शनिवार दोपहर को संपन्न हुई, जिसके बाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें नए लोगों को नौकरी, कमीशन और तेज कमाई का लालच देकर जोड़ा जाता था। इसके बाद उन्हें आगे अन्य लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिससे एक चेन सिस्टम तैयार हो जाता था।
इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने के कारण कई लोगों को आर्थिक नुकसान और मानसिक दबाव का सामना भी करना पड़ा। हालांकि पुलिस यह जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था और इसमें स्थानीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितने लोग शामिल हैं।
नेपाल दूतावास की भूमिका इस मामले में निर्णायक रही, क्योंकि उन्हीं की शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू हुई। दूतावास ने भारतीय प्रशासन से स्पष्ट कहा था कि उनके नागरिकों को गलत तरीके से इस नेटवर्क में फंसाया गया है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की संदिग्ध नेटवर्क मार्केटिंग और ठगी गतिविधियों पर निगरानी और बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है।
इस घटना के बाद एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क मार्केटिंग और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क अक्सर नौकरी और आय के झूठे वादों के जरिए कमजोर और बेरोजगार लोगों को निशाना बनाते हैं।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो तथा इस तरह के संगठित नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
