इंदौर में फर्जी ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए महिला का मोबाइल डेटा हासिल कर अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल करने और ₹4.5 लाख वसूलने का मामला सामने आया।

₹40 हजार का लोन बना साइबर जाल: फर्जी ऐप ने महिला से वसूले ₹4.5 लाख, अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल का आरोप

Team The420
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए साइबर ठगी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि महज ₹40 हजार का त्वरित लोन लेने के बाद वह ऐसे साइबर जाल में फंस गई, जहां ठगों ने उसके मोबाइल फोन का डेटा हासिल कर लिया और फिर लगातार धमकियां देकर उससे करीब ₹4.5 लाख वसूल लिए। इतना ही नहीं, पैसे देने के बावजूद कथित आरोपियों ने उसकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें परिचितों तक भेज दिया, जिससे पीड़िता को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

मामला इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह मामला फर्जी लोन ऐप के जरिए संचालित संगठित साइबर ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है।

शिकायत के अनुसार, अक्टूबर 2025 में पारिवारिक जरूरतों के कारण महिला को तत्काल धनराशि की आवश्यकता थी। इसी दौरान उसे मोबाइल ऐप स्टोर पर एक ऑनलाइन लोन ऐप दिखाई दिया। आसान प्रक्रिया और त्वरित मंजूरी के दावों से प्रभावित होकर उसने ऐप डाउनलोड किया और सात दिनों की अवधि के लिए ₹40 हजार का ऋण लिया। लोन प्रक्रिया पूरी करने के दौरान ऐप ने मोबाइल की कई संवेदनशील अनुमतियां मांगीं, जिन्हें महिला ने मंजूर कर दिया।

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कुछ दिनों बाद उसके पास विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप कॉल और संदेश आने लगे। कॉल करने वाले खुद को रिकवरी एजेंट बताते थे और तत्काल भुगतान का दबाव बनाते थे। महिला का आरोप है कि ऐप इंस्टॉल करने के बाद साइबर ठगों ने उसके मोबाइल में मौजूद फोटो, वीडियो, संपर्क सूची और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बना ली थी।

इसके बाद शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला। आरोपियों ने कथित रूप से महिला को धमकी दी कि यदि अतिरिक्त रकम नहीं दी गई तो उसकी तस्वीरों को एडिट कर अश्लील रूप में तैयार किया जाएगा और उन्हें परिवार, रिश्तेदारों तथा दोस्तों को भेज दिया जाएगा। सामाजिक बदनामी के डर से महिला ने कई बार अलग-अलग खातों और यूपीआई आईडी पर पैसे ट्रांसफर किए।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि पिछले लगभग छह महीनों में उससे करीब ₹4.5 लाख वसूले गए। हैरानी की बात यह रही कि रकम प्राप्त करने के बाद भी आरोपियों ने दबाव बनाना बंद नहीं किया। महिला के अनुसार, कई बार उसके खाते में बिना मांगे ₹5,000 से ₹10,000 तक की छोटी रकम भेज दी जाती थी और बाद में उसी राशि पर भारी ब्याज तथा कथित शुल्क जोड़कर उससे कई गुना अधिक पैसे की मांग की जाती थी।

मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोपियों ने कथित रूप से महिला की तस्वीरों को एडिट कर उसके परिचितों और परिवार के लोगों को भेजना शुरू कर दिया। इसके बाद लगातार फोन कॉल आने लगे और महिला मानसिक तनाव में आ गई। लंबे समय तक उसने इस घटना की जानकारी परिवार से भी छिपाए रखी।

जब उसके बैंक खाते से बड़ी मात्रा में रकम निकलने लगी और बचत लगभग समाप्त हो गई, तब परिवार के सदस्यों को संदेह हुआ। पूछताछ के दौरान महिला ने पूरा घटनाक्रम बताया, जिसके बाद परिजनों ने उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी लोन ऐप आज देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। ये ऐप उपयोगकर्ताओं से संपर्क सूची, फोटो गैलरी, मैसेज और अन्य निजी डेटा की अनुमति लेकर बाद में उसी जानकारी का दुरुपयोग करते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी तकनीकी हैकिंग से अधिक “सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल करते हैं और लोगों की आर्थिक जरूरतों तथा भय का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाते हैं।

पुलिस अब उन बैंक खातों, यूपीआई आईडी और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनके माध्यम से धनराशि का लेनदेन किया गया। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी हो सकती है। वहीं नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें और संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।

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