सीबीआई ने ₹7,623 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में रिलायंस समूह की दो वित्तीय कंपनियों के पूर्व शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।

₹52 करोड़ के बेनामी लेनदेन से खरीदी गई जमीनों का रहस्य गहराया: अशोक खरात पर 20वां मामला दर्ज, पत्नी की तलाश में जुटी जांच एजेंसियां

Team The420
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नासिक। महाराष्ट्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं, बेनामी लेनदेन और भूमि खरीद से जुड़े चर्चित अशोक खरात मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक नए आपराधिक मुकदमे के दर्ज होने के बाद अशोक खरात के खिलाफ मामलों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। जांच एजेंसियां उन जमीनों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही हैं, जिन्हें कथित रूप से बेनामी धन के माध्यम से खरीदा गया बताया जा रहा है।

ताजा मामला सिन्नर क्षेत्र की एक सहकारी पतसंस्था से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और भूमि खरीद से संबंधित है। जांच में सामने आया है कि कुंदेवाड़ी स्थित जगदंबामाता पतसंस्था में कथित तौर पर 32 फर्जी खाते खोले गए थे। आरोप है कि इन खातों के माध्यम से लगभग ₹52 करोड़ के संदिग्ध और बेनामी लेनदेन किए गए। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस धन का उपयोग बाद में विभिन्न स्थानों पर जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि वर्ष 2004 में हुए कुछ भूमि सौदों में खरीदी गई जमीन अशोक खरात की पत्नी कल्पना खरात के नाम दर्ज कराई गई थी। जमीन के मूल मालिक की शिकायत के आधार पर कथित धोखाधड़ी और भूमि खरीद में अनियमितताओं का नया मामला दर्ज किया गया है। इसी मामले में अशोक खरात को दोबारा हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक भूमि सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वर्षों में फैले एक बड़े वित्तीय नेटवर्क और कथित बेनामी निवेशों से जुड़ा हो सकता है। इसी वजह से विभिन्न एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, संपत्ति पंजीकरण और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं, ताकि धन के प्रवाह और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जा सके।

मामले में नामकर्ण आवारे को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उनका संबंध संबंधित पतसंस्था और एक औद्योगिक इकाई से बताया गया है। जांच एजेंसियां अशोक खरात और नामकर्ण आवारे के बीच संभावित वित्तीय संबंधों और भूमि सौदों की भी जांच कर रही हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

इस पूरे प्रकरण में कल्पना खरात की भूमिका सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार जिन जमीनों और संपत्तियों की जांच की जा रही है, उनमें से कई उनके नाम पर दर्ज हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें न तो गिरफ्तार किया जा सका है और न ही उनका वर्तमान ठिकाना पता चल पाया है। यही कारण है कि जांच में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांच के दौरान नासिक, सिन्नर, शिर्डी और पुणे सहित कई स्थानों पर खरीदी गई जमीनों और व्यावसायिक संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। अब एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग की गई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध कथित बेनामी लेनदेन से था।

वित्तीय अपराध मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारी संस्थाओं और फर्जी खातों के माध्यम से किए गए कथित लेनदेन की जांच बेहद जटिल होती है। ऐसे मामलों में धन के स्रोत, लाभार्थियों और संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व का पता लगाने के लिए वर्षों पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करनी पड़ती है।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी पहले कुछ वित्तीय लेनदेन और कथित बेनामी निवेशों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आ चुकी है। हालांकि अब तक किसी एजेंसी ने पूरे नेटवर्क को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

अशोक खरात के खिलाफ लगातार बढ़ते मामलों और करोड़ों रुपये की कथित संपत्तियों से जुड़े खुलासों ने इस प्रकरण को महाराष्ट्र के सबसे चर्चित वित्तीय और भूमि विवाद मामलों में शामिल कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां धन के प्रवाह, कथित बेनामी निवेशों और संपत्ति खरीद से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा कब और कैसे करती हैं।

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