कानपुर। कानपुर नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर हुए साइबर हमले के बाद स्थिति सामान्य करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वेबसाइट हैक होने के दूसरे दिन भी इसे बहाल नहीं किया जा सका, जिसके चलते नगर निगम से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की दिल्ली स्थित विशेषज्ञ टीम ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत वेबसाइट को फिलहाल 1 जून तक ब्लॉक कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित साइबर घुसपैठ को रोका जा सके और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर करीब दो बजे साइबर हमले का शिकार हुई थी। शुरुआती तकनीकी जांच में यह संकेत मिले हैं कि वेबसाइट को जिस आईपी एड्रेस के माध्यम से निशाना बनाया गया, उसका संबंध बांग्लादेश से हो सकता है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इस पहलू की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी हैं और साइबर हमले के स्रोत, उद्देश्य तथा संभावित नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
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एनआईसी की टीम ने नगर निगम की वेबसाइट से जुड़ी लॉगिन आईडी, पासवर्ड, सर्वर कॉन्फिगरेशन और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर विश्लेषण शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वेबसाइट को अस्थायी रूप से बंद करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी हैकर ने सिस्टम में बैकडोर या अन्य दुर्भावनापूर्ण एक्सेस स्थापित किया हो तो उसका आगे दुरुपयोग न किया जा सके।
जांच में सामने आया है कि वेबसाइट से महापौर, पार्षदों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की तस्वीरें तथा संपर्क विवरण प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा नगर निगम सदन और कार्यकारिणी की बैठकों के मिनट्स तथा बजट संबंधी कुछ महत्वपूर्ण डेटा भी वेबसाइट से गायब बताया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि डेटा केवल डिलीट किया गया है या उसकी कॉपी भी चुराई गई है। इसी कारण डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण को जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, कर संग्रहण तथा निविदा संबंधी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इसके चलते नागरिक सेवाओं पर व्यापक असर नहीं पड़ा है, लेकिन वेबसाइट आधारित कई सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वेबसाइट को दोबारा सक्रिय करने से पहले उसकी सुरक्षा का व्यापक ऑडिट किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि किसी भी सरकारी वेबसाइट पर साइबर हमला केवल तकनीकी चुनौती नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास और डेटा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होता है। उनके अनुसार साइबर अपराधी अक्सर वेबसाइट हैकिंग के बाद उपलब्ध डेटा का उपयोग फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध लिंक, ईमेल, कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।
इसी बीच नगर निगम प्रशासन ने भी शहरवासियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम के नाम से हाउस टैक्स, लाइसेंस, प्रमाण पत्र या अन्य सेवाओं से संबंधित कोई लिंक व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के माध्यम से प्राप्त हो तो उसे बिना सत्यापन के क्लिक न किया जाए। इसी प्रकार किसी भी संदिग्ध कॉल को गंभीरता से लेते हुए उसकी सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल एनआईसी और नगर निगम की तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से डेटा रिकवरी, साइबर फोरेंसिक जांच और सुरक्षा ऑडिट में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं से संतुष्ट होने के बाद ही वेबसाइट को दोबारा सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला जाएगा। यह घटना एक बार फिर सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है और मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
“कानपुर नगर निगम की वेबसाइट हैक, एनआईसी ने 1 जून तक किया ब्लॉक; डेटा रिकवरी बनी सबसे बड़ी चुनौती”
बांग्लादेशी आईपी एड्रेस से साइबर हमले की आशंका, अधिकारियों और पार्षदों का डेटा प्रभावित; नागरिकों को फर्जी लिंक और कॉल से सतर्क रहने की सलाह
कानपुर। कानपुर नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर हुए साइबर हमले के बाद स्थिति सामान्य करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वेबसाइट हैक होने के दूसरे दिन भी इसे बहाल नहीं किया जा सका, जिसके चलते नगर निगम से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की दिल्ली स्थित विशेषज्ञ टीम ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत वेबसाइट को फिलहाल 1 जून तक ब्लॉक कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित साइबर घुसपैठ को रोका जा सके और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर करीब दो बजे साइबर हमले का शिकार हुई थी। शुरुआती तकनीकी जांच में यह संकेत मिले हैं कि वेबसाइट को जिस आईपी एड्रेस के माध्यम से निशाना बनाया गया, उसका संबंध बांग्लादेश से हो सकता है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इस पहलू की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी हैं और साइबर हमले के स्रोत, उद्देश्य तथा संभावित नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
एनआईसी की टीम ने नगर निगम की वेबसाइट से जुड़ी लॉगिन आईडी, पासवर्ड, सर्वर कॉन्फिगरेशन और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर विश्लेषण शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वेबसाइट को अस्थायी रूप से बंद करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी हैकर ने सिस्टम में बैकडोर या अन्य दुर्भावनापूर्ण एक्सेस स्थापित किया हो तो उसका आगे दुरुपयोग न किया जा सके।
जांच में सामने आया है कि वेबसाइट से महापौर, पार्षदों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की तस्वीरें तथा संपर्क विवरण प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा नगर निगम सदन और कार्यकारिणी की बैठकों के मिनट्स तथा बजट संबंधी कुछ महत्वपूर्ण डेटा भी वेबसाइट से गायब बताया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि डेटा केवल डिलीट किया गया है या उसकी कॉपी भी चुराई गई है। इसी कारण डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण को जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, कर संग्रहण तथा निविदा संबंधी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इसके चलते नागरिक सेवाओं पर व्यापक असर नहीं पड़ा है, लेकिन वेबसाइट आधारित कई सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वेबसाइट को दोबारा सक्रिय करने से पहले उसकी सुरक्षा का व्यापक ऑडिट किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि किसी भी सरकारी वेबसाइट पर साइबर हमला केवल तकनीकी चुनौती नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास और डेटा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होता है। उनके अनुसार साइबर अपराधी अक्सर वेबसाइट हैकिंग के बाद उपलब्ध डेटा का उपयोग फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध लिंक, ईमेल, कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।
इसी बीच नगर निगम प्रशासन ने भी शहरवासियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम के नाम से हाउस टैक्स, लाइसेंस, प्रमाण पत्र या अन्य सेवाओं से संबंधित कोई लिंक व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के माध्यम से प्राप्त हो तो उसे बिना सत्यापन के क्लिक न किया जाए। इसी प्रकार किसी भी संदिग्ध कॉल को गंभीरता से लेते हुए उसकी सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल एनआईसी और नगर निगम की तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से डेटा रिकवरी, साइबर फोरेंसिक जांच और सुरक्षा ऑडिट में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं से संतुष्ट होने के बाद ही वेबसाइट को दोबारा सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला जाएगा। यह घटना एक बार फिर सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है और मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
