नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी “बेहद पीड़ादायक” होती हैं, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी और उनके परिजन वर्षों की मेहनत, उम्मीद और भावनाएं निवेश करते हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने की। अदालत NEET-UG पेपर लीक से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन या उसे एक अधिक स्वतंत्र और मजबूत संस्था से बदलने की मांग भी शामिल है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश के युवाओं को निराश नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने टिप्पणी की कि जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं तो छात्रों और उनके परिवारों पर गहरा मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए वास्तविक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है और स्थिति पर उच्च स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं ताकि दोबारा किसी प्रकार की चूक न हो।
मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG पुनर्परीक्षा के लिए कई नई सुरक्षा व्यवस्थाएं और निगरानी तंत्र लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को रोका जा सके।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल नई व्यवस्थाएं लागू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन चूकों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हुई। पीठ ने कहा कि “वास्तविक समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होती।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में तय की। अदालत अब यह जानना चाहती है कि पेपर लीक को रोकने के लिए क्या ठोस सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या संस्थागत बदलाव प्रस्तावित हैं।
गौरतलब है कि 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी थी। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है।
यह मामला पिछले वर्ष हुए NEET-UG विवाद की याद भी दिला रहा है, जब कथित पेपर लीक के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन भविष्य में सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए थे। इस बार अदालत पहले से अधिक सख्त रुख में दिखाई दे रही है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन तैयारी करते हैं और ऐसे मामलों से उनका मनोबल प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा संचालन प्रणाली में व्यापक प्रशासनिक और कानूनी सुधारों की भी आवश्यकता है।
फिलहाल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई, केंद्र सरकार के हलफनामे और 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा की व्यवस्थाओं पर टिकी हुई हैं।
