झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक बड़े साइबर वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड में किया जा रहा था। शुरुआती जांच में खाते से जुड़े दर्जनों साइबर शिकायतों का पता चला है और पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस को गोपनीय सूचना मिली कि “मैसर्स रेहान नॉनवेज पॉइंट” के नाम से संचालित एक बैंक खाते का उपयोग साइबर धोखाधड़ी में किया जा रहा है। सूचना के बाद पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण शुरू किया। जांच में सामने आया कि संबंधित खाता यस बैंक की झालावाड़ शाखा में संचालित हो रहा था और उससे जुड़े कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन विभिन्न राज्यों की साइबर शिकायतों से लिंक पाए गए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान इस खाते से संबंधित कुल 36 साइबर शिकायतें दर्ज पाई गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने विशेष टीम गठित की और तकनीकी निगरानी के आधार पर खाताधारक रहबर को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
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पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसने पैसों के लालच में अपना बैंक खाता दूसरे आरोपी आसिफ शेख को उपलब्ध कराया था। जांच एजेंसियों के अनुसार बैंक खाता खुलवाने से लेकर उसमें मोबाइल नंबर लिंक कराने और डिजिटल संचालन की पूरी प्रक्रिया में आसिफ शेख की भूमिका सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों का उपयोग कितनी साइबर वारदातों में किया गया और इनके तार किन अन्य साइबर अपराधी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी कथित तौर पर “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने और असली अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बैंक खातों की खरीद-फरोख्त साइबर अपराधियों की बड़ी रणनीति बन चुकी है। अपराधी अक्सर बेरोजगार युवाओं, छोटे व्यापारियों या आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते किराये पर लेते या खरीद लेते हैं। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल निवेश ठगी, फर्जी ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट, OTP फ्रॉड और ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम जैसी वारदातों में किया जाता है।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, “म्यूल अकाउंट नेटवर्क आधुनिक साइबर वित्तीय अपराध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। अपराधी सीधे अपने खातों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि कई स्तरों पर बैंक खातों की चेन बनाकर पैसों की ट्रेल को जटिल बना देते हैं। इससे जांच एजेंसियों के सामने वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल बैंक खाता बेचने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि जानबूझकर अपना खाता उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। जांच एजेंसियां अब डिजिटल बैंकिंग पैटर्न, मोबाइल नंबर, IP लॉग और KYC रिकॉर्ड्स के जरिए साइबर नेटवर्क की पूरी चेन ट्रैक करने की कोशिश कर रही हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस या मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि मामूली कमीशन या लालच के बदले बैंक खाता उपलब्ध कराना गंभीर अपराध माना जा सकता है और ऐसे लोग भी साइबर अपराध मामलों में आरोपी बनाए जा सकते हैं।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा संभावित साइबर ठगी मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
