2026 से लागू संशोधित PAN नियमों के तहत हाई-वैल्यू कैश जमा, प्रॉपर्टी डील और बड़े वित्तीय लेन-देन पर आयकर विभाग की निगरानी सख्त हुई।

“PAN नियमों में बड़ा बदलाव”: कैश जमा से प्रॉपर्टी डील तक नए सिस्टम पर सख्त निगरानी, छोटी चूक भी ला सकती है टैक्स नोटिस

Team The420
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नई दिल्ली। वर्ष 2026 से पैन कार्ड (PAN) और हाई-वैल्यू वित्तीय लेन-देन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव लागू होने के बाद टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन व्यवस्था का स्वरूप बदल गया है। संशोधित आयकर नियमों के तहत जहां कुछ सामान्य कैश ट्रांजैक्शन और भुगतान प्रक्रियाओं में राहत दी गई है, वहीं प्रॉपर्टी खरीद, भारी नकद जमा, बीमा प्रीमियम और बड़े भुगतान जैसे मामलों पर निगरानी पहले की तुलना में अधिक सख्त कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब छोटी लापरवाही भी आयकर विभाग की जांच और नोटिस का कारण बन सकती है।

नए ढांचे के तहत सरकार ने ‘फॉर्म 60’ की जगह ‘फॉर्म 97’ लागू किया है। इसके जरिए बिना पैन कार्ड के बड़े वित्तीय लेन-देन की गुंजाइश को सीमित करने की कोशिश की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का उद्देश्य रोजमर्रा की बैंकिंग प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन संपत्ति निर्माण और उच्च-मूल्य लेन-देन की ट्रैकिंग को तकनीकी रूप से अधिक मजबूत करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

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संशोधित नियमों के मुताबिक अब एक दिन में ₹50,000 से अधिक नकद जमा करने पर तुरंत पैन नंबर देना अनिवार्य नहीं रहेगा। पहले इस सीमा को पार करते ही बैंक को पैन विवरण दर्ज करना पड़ता था। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि निगरानी पूरी तरह समाप्त हो गई है। अब बैंक वार्षिक आधार पर कुल नकद जमा का रिकॉर्ड रखेंगे और यदि यह राशि ₹10 लाख से अधिक पहुंचती है तो उसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को भेजी जा सकती है। इससे पहले यह सीमा ₹2.5 लाख थी।

इसी तरह बैंक ड्राफ्ट, बैंकर चेक और पे-ऑर्डर खरीदने के लिए नकद भुगतान पर भी तत्काल पैन अनिवार्यता में ढील दी गई है। पहले एक दिन में ₹50,000 से अधिक के नकद भुगतान पर पैन देना जरूरी होता था। अब यह शर्त हटाई गई है, हालांकि सालाना वित्तीय गतिविधियों की निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।

विदेश यात्रा से जुड़े भुगतान और विदेशी मुद्रा खरीद के मामलों में भी बदलाव किया गया है। अब विदेशी यात्रा पैकेज बुक कराने या फॉरेन करेंसी खरीदने के लिए अलग से पैन देना आवश्यक नहीं होगा, जब तक कि लेन-देन उच्च-मूल्य रिपोर्टिंग सीमा में न आता हो। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

होटल और रेस्टोरेंट में नकद भुगतान की सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले ₹50,000 से अधिक के भुगतान पर पैन देना अनिवार्य था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है। माना जा रहा है कि इससे बड़े पारिवारिक आयोजनों, विवाह समारोहों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े नकद भुगतानों में सुविधा मिलेगी।

हालांकि राहतों के साथ निगरानी तंत्र भी पहले से अधिक व्यापक किया गया है। आयकर विशेषज्ञों के अनुसार अब विभाग विशेष रूप से वार्षिक नकद जमा और निकासी, ₹45 लाख से अधिक के प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन, भारी बीमा प्रीमियम भुगतान, बड़े इवेंट खर्च और बिना पैन वाले हाई-वैल्यू सौदों पर नजर रखेगा। डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए विभिन्न वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी का मिलान किया जाएगा।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अब अपने बैंकिंग और निवेश रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने होंगे। विशेष रूप से ऐसे लोग जो नकद लेन-देन अधिक करते हैं, उन्हें हर बड़े भुगतान का दस्तावेजी आधार सुरक्षित रखना चाहिए। आयकर विभाग अब केवल एकल ट्रांजैक्शन नहीं बल्कि पूरे वित्तीय व्यवहार के पैटर्न का विश्लेषण कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार नए नियम यह संकेत देते हैं कि सरकार कैश-आधारित अर्थव्यवस्था को पूरी तरह खत्म किए बिना उसकी पारदर्शिता बढ़ाना चाहती है। सामान्य उपभोक्ताओं को कुछ प्रक्रियात्मक राहत दी गई है, लेकिन हाई-वैल्यू लेन-देन करने वालों के लिए जवाबदेही और रिपोर्टिंग का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त हो गया है।

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