गाजियाबाद में फर्जी SEBI लाइसेंस, WhatsApp निवेश ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिए कारोबारी से ₹85.38 लाख की साइबर ठगी।

500% मुनाफे का झांसा देकर कारोबारी से ₹85 लाख की साइबर ठगी: फर्जी SEBI लाइसेंस और WhatsApp ग्रुप से रचा गया निवेश जाल

Team The420
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गाजियाबाद। शेयर बाजार और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ताजा मामला गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक कारोबारी को 500 प्रतिशत तक मुनाफा दिलाने का दावा कर साइबर अपराधियों ने ₹85.38 लाख की ठगी कर ली। आरोपियों ने फर्जी SEBI लाइसेंस, नकली निवेश दस्तावेज और WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल कर पीड़ित का भरोसा जीता और फिर अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली।

पीड़ित कारोबारी शैलेंद्र प्रताप ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, आठ नवंबर को उन्होंने YouTube पर “Mehta Is Back” नाम के चैनल से जुड़ा एक ऑनलाइन ट्रेडिंग विज्ञापन देखा। विज्ञापन पर क्लिक करते ही उनके मोबाइल पर लगातार WhatsApp संदेश आने लगे। संदेश भेजने वाले खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ और निवेश सलाहकार बता रहे थे।

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जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए फर्जी SEBI लाइसेंस, कंपनी के दस्तावेज और कथित ट्रेडिंग रिकॉर्ड साझा किए। इसके बाद उन्हें “Smart Trade Group” नाम के एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां कई लोगों को भारी मुनाफा कमाते हुए दिखाया जा रहा था। ग्रुप में लगातार ऐसे संदेश डाले जाते थे, जिनसे यह आभास हो कि सदस्य AI आधारित स्टॉक ट्रेडिंग, IPO, FPO और बल्क डील्स के जरिए लाखों रुपये कमा रहे हैं।

साइबर अपराधियों ने बाद में पीड़ित को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा और उसी एप के जरिए निवेश शुरू कराया। शुरुआत में छोटे निवेश पर कथित मुनाफा दिखाया गया ताकि कारोबारी का भरोसा मजबूत हो सके। आरोपियों ने तीन बार में करीब ₹24 हजार की रकम निकलवाने भी दी, जिससे पीड़ित को लगा कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म असली है और निवेश सुरक्षित है।

इसके बाद अपराधियों ने दावा किया कि यदि अधिक रकम निवेश की जाए तो 500 प्रतिशत तक रिटर्न मिल सकता है। इसी लालच में पीड़ित ने आठ दिसंबर से 14 जनवरी के बीच 15 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल ₹85.38 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने हर बार अलग खाते उपलब्ध कराए और निवेश को “प्रीमियम ट्रेडिंग अवसर” बताया।

कुछ समय बाद जब पीड़ित ने अपने निवेश और मुनाफे की बड़ी रकम निकालने की कोशिश की, तो बहाने शुरू हो गए। कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस और कभी वेरिफिकेशन शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाने लगी। संदेह होने पर कारोबारी ने संबंधित कंपनी के शिकायत विभाग में ईमेल किया। वहां से जवाब मिला कि कंपनी ऐसी कोई ऑनलाइन निवेश सेवा संचालित नहीं करती और उसके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुका है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर ठग अब निवेश और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर बेहद संगठित तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर पहले विश्वास बनाते हैं, फिर नकली दस्तावेज, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और WhatsApp ग्रुप के जरिए निवेशकों को भ्रमित करते हैं। उनके मुताबिक, “गारंटीड हाई रिटर्न” और “कम समय में कई गुना मुनाफा” जैसे दावे साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा संकेत होते हैं।

साइबर क्राइम थाना पुलिस अब मामले में बैंक खातों, मोबाइल एप, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संदिग्ध नंबरों की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह किसी बड़े संगठित साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को निशाना बना रहा है।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, WhatsApp निवेश ग्रुप या सोशल मीडिया विज्ञापन के आधार पर पैसा निवेश न करें। निवेश से पहले SEBI पंजीकरण, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और लाइसेंस की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

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