पुणे में आईटी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹44 लाख की ठगी का मामला सामने आया, युवाओं को दिवालिया कंपनी में नियुक्ति देकर शिकार बनाने का आरोप

“बैकडोर जॉब” के नाम पर साइबर ठगी का जाल: फर्जी कंसल्टेंसी चलाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों की ठगी, चार गिरफ्तार

Team The420
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हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में “बैकडोर सॉफ्टवेयर जॉब” दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ है। अंबरपेट पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फर्जी जॉब कंसल्टेंसी चलाने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को फंसाकर उनसे लाखों रुपये वसूलता था और बाद में नकली नियुक्ति पत्र भेजकर गायब हो जाता था।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टेम्बेलवार किशोर उर्फ गोपी कृष्णा उर्फ मंजूनाथ, किर्थिक बी.वाई. उर्फ रॉयल मोसिस, वेमुला शंकर और अलावाला साई अशोक के रूप में हुई है। सभी आरोपी “Admifit Consultancy” नाम से फर्जी जॉब कंसल्टेंसी संचालित कर रहे थे। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जबकि गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अब भी फरार बताए जा रहे हैं।

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जांच के मुताबिक, गिरोह बेरोजगार युवाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर Facebook के माध्यम से निशाना बनाता था। आरोपियों द्वारा प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनियों में नौकरी दिलाने का दावा किया जाता था और “डायरेक्ट प्लेसमेंट” या “बैकडोर एंट्री” का लालच देकर युवाओं से मोटी रकम वसूली जाती थी।

मामले का खुलासा तब हुआ जब अंबरपेट क्षेत्र की एक 34 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसे सोशल मीडिया पर संपर्क कर सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोपियों की बातों पर विश्वास कर उसने कथित भर्ती प्रक्रिया के नाम पर करीब ₹2.3 लाख ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसे जो नियुक्ति पत्र भेजा गया, वह फर्जी निकला।

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह का प्रत्येक सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहा था। मुख्य आरोपी किशोर बेरोजगार युवाओं की पहचान कर उनसे संपर्क स्थापित करता था और उनके बायोडाटा अन्य आरोपियों तक पहुंचाता था। वहीं, बेंगलुरु से ऑपरेट कर रहा किर्थिक कथित तौर पर प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर नकली अपॉइंटमेंट लेटर तैयार कर WhatsApp के जरिए भेजता था।

पुलिस ने बताया कि वेमुला शंकर फर्जी बैंक खाते और SIM कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। वहीं, अलावाला साई अशोक बैंक खातों के संचालन और धनराशि के लेनदेन में सहयोग करता था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने कम से कम 35 से 40 बेरोजगार युवाओं को ठगी का शिकार बनाया। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का संबंध अब तक 11 FIR और लगभग 25 साइबर शिकायतों से जुड़ चुका है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि ठगी का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, SIM कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और करीब ₹2 लाख नकद बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को “गारंटीड प्लेसमेंट” और “बैकडोर जॉब” जैसे दावों से सतर्क रहना चाहिए। उनके अनुसार, साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर युवाओं की जल्द नौकरी पाने की मानसिकता का फायदा उठाते हैं।

एक Researcher at Algoritha Security ने बताया कि फर्जी जॉब स्कैम में अब नकली HR प्रोफाइल, AI-जनरेटेड ईमेल और फर्जी कॉर्पोरेट वेबसाइटों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी नौकरी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ईमेल माध्यम से जरूर की जानी चाहिए।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित नौकरी विज्ञापनों पर आंख बंद कर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

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