कानपुर में पुलिस ने नेपाल से लाई गई करीब ₹15 करोड़ कीमत की कथित चरस बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

“कॉल गर्ल सर्विस” के नाम पर साइबर ठगी का जाल: 58 ट्रांजैक्शन में छात्र से ₹4.63 लाख ऐंठे, तीन आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में “कॉल गर्ल सर्विस” उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने राजस्थान के डूंगरपुर जिले से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर एक अंतरराज्यीय ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी फर्जी वेबसाइट, WhatsApp चैट और कई UPI खातों के जरिए लोगों को जाल में फंसाकर उनसे लगातार पैसे ऐंठते थे। मामले में एक छात्र से करीब ₹4.63 लाख की ठगी किए जाने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवशंकर, प्रकाश और ईश्वर के रूप में हुई है। तीनों को राजस्थान के डूंगरपुर जिले के गामड़ी देवकी गांव से गिरफ्तार किया गया। अदालत में पेशी के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं।

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मामले का खुलासा तब हुआ जब सोनीपत निवासी एक छात्र ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि 28 मार्च को Google Chrome पर उसे एक ऑनलाइन विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें “Okelute” नामक वेबसाइट के जरिए कॉल गर्ल सर्विस उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद उसका संपर्क एक WhatsApp नंबर से हुआ, जहां उसे अलग-अलग “सर्विस पैकेज” ऑफर किए गए।

पीड़ित ने तीन घंटे की कथित सेवा के लिए ₹4,000 वाला पैकेज चुना और ₹1,000 एडवांस ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने “वेरिफिकेशन चार्ज”, “सिटी एंट्री फीस”, “GST”, “रिफंड प्रोसेसिंग फीस” और अन्य बहानों के नाम पर लगातार पैसे मांगने शुरू कर दिए। हर बार पीड़ित को यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि पूरी राशि बाद में वापस कर दी जाएगी।

जांच के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों और UPI आईडी का इस्तेमाल करते हुए युवक से 58 अलग-अलग ट्रांजैक्शन करवाए। पुलिस के अनुसार, पीड़ित की मां के बैंक खाते से करीब ₹4.63 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। रकम लेने के बावजूद आरोपियों ने न तो कोई सेवा उपलब्ध कराई और न ही पैसे लौटाए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विशेष जांच टीम गठित की गई। तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग, बैंकिंग ट्रांजैक्शन विश्लेषण और डिजिटल ट्रेल की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कई राज्यों में इसी तरह के ऑनलाइन एडल्ट सर्विस और सोशल मीडिया फ्रॉड मामलों से जुड़ा हो सकता है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, SIM कार्ड, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डिवाइस बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कितने लोगों को इसी तरह निशाना बनाया गया।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब लोगों की निजी कमजोरियों और सामाजिक शर्म की मानसिकता का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में कई पीड़ित बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़ जाते हैं। उन्होंने लोगों से संदिग्ध वेबसाइट, निजी चैट और अनजान भुगतान लिंक पर भरोसा न करने की सलाह दी।

Future Crime Research Foundation से जुड़े एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, इस तरह के फ्रॉड में अपराधी फर्जी वेबसाइट, अस्थायी मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट सिस्टम और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में वेबसाइट कुछ दिनों तक सक्रिय रहती हैं और ठगी के बाद तुरंत बंद कर दी जाती हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन या ऑनलाइन ऑफर पर आंख बंद कर भरोसा न करें। अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। पुलिस के अनुसार, समय पर शिकायत मिलने से ठगी गई रकम को फ्रीज कराने और आरोपियों तक पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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