कानपुर में पुलिस ने नेपाल से लाई गई करीब ₹15 करोड़ कीमत की कथित चरस बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

सेना को घटिया सामान सप्लाई मामला: सीबीआई जांच में कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, टेंडर हेरफेर और रिश्वतखोरी का खुलासा

Team The420
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कानपुर। सेना को घटिया गुणवत्ता का सामान सप्लाई करने और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर के गंभीर मामले में सीबीआई की जांच अब तेज हो गई है। कानपुर के रूमा क्षेत्र स्थित कंपनी ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड की गतिविधियों पर एजेंसी की विशेष नजर है, जहां मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई सिस्टम को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच एजेंसी को सबसे बड़ा संदेह कंपनी के आकार और उसके दावे के बीच भारी अंतर को लेकर है। जानकारी के अनुसार, कंपनी 78 प्रकार के उत्पाद बनाने का दावा करती है, लेकिन वास्तविक रूप से वहां केवल 27 कर्मचारी ही दर्ज हैं। इसी असंतुलन ने जांच को यह दिशा दी है कि कहीं कंपनी कागजों में मैन्युफैक्चरिंग दिखाकर असल में ट्रेडिंग तो नहीं कर रही थी।

सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि क्या कंपनी दूसरे निर्माताओं से तैयार माल खरीदकर उसे अपने ब्रांड नाम से सेना को सप्लाई कर रही थी। शुरुआती इनपुट में यह भी सामने आया है कि गुणवत्ता जांच प्रक्रिया और टेंडर अनुमोदन में नियमों की अनदेखी की गई थी, जिससे घटिया सामान की आपूर्ति संभव हो सकी।

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विशेषज्ञों के अनुसार, सेना की खरीद प्रक्रिया अत्यंत सख्त होती है, जिसमें केवल प्रमाणित निर्माताओं से ही सामान लिया जाता है। हर उत्पाद के लिए सैंपल टेस्ट, तकनीकी मूल्यांकन और गुणवत्ता मंजूरी अनिवार्य होती है। ऐसे में मैन्युफैक्चरिंग बनाम ट्रेडिंग का संदेह इस मामले को और गंभीर बना देता है।

अब तक की कार्रवाई के अनुसार, 18 मई को सीबीआई ने इस मामले में कर्नल हिमांशु बाली समेत कुल छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया और घटिया गुणवत्ता के सामान को मंजूरी दिलाई।

इसके बाद 17 और 20 मई को सीबीआई ने कानपुर और कैंट क्षेत्र में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान रूमा स्थित फैक्ट्री और करियप्पा मार्ग पर स्थित रक्षा उद्यमी के आवास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। जांच के दौरान कंपनी के संचालक के परिजनों और करीबी रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई।

सीबीआई ने इस मामले में दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, जबकि कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और बिलिंग रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सप्लाई किए गए सामान के भुगतान में किस स्तर पर अनियमितता हुई।

जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी से संबंध होने की भी चर्चा है, जिसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीबीआई यह पता लगा रही है कि क्या टेंडर मंजूरी और गुणवत्ता प्रमाणन प्रक्रिया में किसी प्रकार का प्रभाव या मिलीभगत शामिल थी।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब सीबीआई ने पाया कि कर्नल हिमांशु बाली पर लगभग ₹50 लाख की रिश्वत लेने का आरोप है। आरोप है कि इसके बदले में उन्होंने घटिया सामान को मंजूरी दी और भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

कार्रवाई के बाद से कंपनी के संचालक अक्षत अग्रवाल और उनके पिता मयंक अग्रवाल फरार बताए जा रहे हैं। सीबीआई उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। उनके अलावा दिल्ली स्थित सहयोगी आशुतोष शुक्ला और नरेश पाल को भी नामजद किया गया है।

फिलहाल सीबीआई पूरे नेटवर्क की वित्तीय परतों को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह केवल एक टेंडर घोटाला है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित रैकेट काम कर रहा था। एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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