ग्रेटर नोएडा। एसटीएफ नोएडा यूनिट ने दिल्ली-एनसीआर में विदेशी मादक पदार्थों की ऑनलाइन तस्करी करने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई रविवार को परी चौक क्षेत्र में की गई, जहां से मुख्य आरोपी को दबोचा गया। आरोपी की पहचान गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित अजनारा इंटीग्रिटी निवासी गौरव खन्ना के रूप में हुई है, जो डार्क वेब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई का संचालन कर रहा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को निशाना बनाता था। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि सोशल मीडिया ग्रुप्स और डार्क वेब आधारित नेटवर्क के माध्यम से विदेशी किस्म के ड्रग्स जैसे इम्पोर्टेड गांजा, ओजी, बाबा कुश, चरस और अन्य मादक पदार्थों की सप्लाई की जा रही है।
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सूचना के आधार पर एसटीएफ ने जाल बिछाया और परी चौक के आसपास आरोपी को ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले इस गिरोह के एक अन्य सदस्य करण राजीव को 5 मई 2026 को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से भारी मात्रा में मादक पदार्थों के साथ इलेक्ट्रॉनिक तराजू, पासबुक, चेकबुक, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी गौरव खन्ना ने वर्ष 1999 में फरीदाबाद के डीएवी कॉलेज से बीसीए की पढ़ाई की थी। कॉलेज के दौरान एक हत्या मामले में उसका नाम सामने आने के बाद वह लगभग 10 महीने तक रोहतक जेल में भी रहा। जेल से बाहर आने के बाद उसने कुछ समय तक फाइनेंस का काम किया और बाद में गाजियाबाद में बस गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से उसने संगठित रूप से ड्रग्स सप्लाई का नेटवर्क शुरू किया। वह थाईलैंड से इम्पोर्टेड गांजा और हिमाचल प्रदेश से चरस मंगवाकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचता था। इस पूरे नेटवर्क में सोशल मीडिया ग्रुप्स का इस्तेमाल कर छात्रों को जोड़ा जाता था और उन्हें “हाई क्वालिटी विदेशी ड्रग्स” का लालच देकर ऑर्डर लिया जाता था।
एसटीएफ के अनुसार यह नेटवर्क पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित था। आरोपी भुगतान के लिए यूपीआई और बैंक खातों का उपयोग करता था, जिससे लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा सप्लाई के लिए रैपिडो, उबर और पोर्टर जैसी डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता था ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर शक न हो।
ड्रग्स की पैकिंग इस तरह की जाती थी कि वह सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सामान, कंप्यूटर पार्ट्स या पेन ड्राइव जैसी दिखे, जिससे डिलीवरी के दौरान किसी को शक न हो। जांच में अब तक 17 बैंक खातों का पता लगाया गया है, जिनके जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए गए थे।
एजेंसियों का कहना है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और छात्रों को अपने नेटवर्क में जोड़कर लगातार विस्तार कर रहा था। आरोपी के खिलाफ पहले से हत्या, मारपीट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पूछताछ में आरोपी ने ड्रग्स की कीमतों का भी खुलासा किया है। उसके अनुसार ओजी गांजा करीब ₹1400 प्रति ग्राम, हशीश ₹4500 प्रति 10 ग्राम, बाबा कुश ₹5500 प्रति ग्राम और एलएसडी जैसे खतरनाक ड्रग्स ₹4400 प्रति ग्राम तक बेचे जाते थे।
फिलहाल एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक स्थानीय रैकेट नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसकी तह तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
