आगरा में AI की मदद से नामी कंपनियों की पैकिंग, QR कोड और केमिकल कंपोजिशन की नकल कर नकली दवाएं बनाने वाले रैकेट का खुलासा।

AI से डिजाइन कर लैब टेस्टिंग पास करा रहीं नकली दवाएं: आगरा में हाईटेक फार्मा रैकेट का खुलासा

Team The420
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आगरा। नकली दवाओं के अवैध कारोबार में अब माफिया पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाईटेक और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आगरा में सामने आए एक बड़े रैकेट में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नामी फार्मा कंपनियों की पैकेजिंग, QR कोड और लेबलिंग तक की हूबहू नकल तैयार कर रहे थे, ताकि बाजार में नकली दवाओं की पहचान लगभग असंभव हो जाए।

औषधि विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में नकली दवाओं को असली जैसा दिखाने के लिए बाकायदा लैब टेस्टिंग का सहारा लिया जाता था। लखनऊ मुख्यालय से आई 30 औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने तीन दिनों तक चले अभियान में 18 फर्मों और दो गोदामों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में करीब ₹2 करोड़ की नकली, सैंपल, एक्सपायर्ड और सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की गई दवाएं बरामद की गईं।

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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में यह चौंकाने वाली जानकारी मिली कि गिरोह पहले नामी कंपनियों की दवाओं की पैकिंग खरीदता था और फिर AI टूल्स की मदद से उसी डिजाइन, रंग, फॉन्ट और QR कोड को कॉपी कर नया पैकेट तैयार करता था। इसके बाद दवा के केमिकल कंपोजिशन को समझने के लिए असली दवाओं की निजी लैब में जांच कराई जाती थी, और उसी आधार पर नकली दवाओं में समान तत्व मिलाए जाते थे।

अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया इतनी सटीक तरीके से की जाती थी कि कई बार निजी लैब टेस्ट में भी ये नकली दवाएं पास हो जाती थीं। इसी कारण बाजार में इनकी पहचान करना और भी कठिन हो गया था। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश यादव ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और सैंपल मिले हैं, जो इस संगठित नेटवर्क की पुष्टि करते हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि माफिया पहले बाजार में नामी कंपनियों की दवाएं कम कीमत पर सप्लाई करते थे, जिससे स्थानीय मेडिकल स्टोर उनके ग्राहक बन जाते थे। इसके बाद धीरे-धीरे असली और नकली दवाओं का मिश्रण बाजार में फैलाया जाता था। जब कंपनी की बिक्री प्रभावित होने लगती, तो वही लोग विभाग में शिकायत कर कार्रवाई करवाते थे और बाद में फिर नए नेटवर्क के साथ बाजार में सक्रिय हो जाते थे।

औषधि विभाग ने इस मामले में 18 मेडिकल स्टोरों को नोटिस जारी किया है और पिछले तीन महीनों के खरीद-बिक्री के बिल तलब किए गए हैं। इन दुकानों से सरकारी सप्लाई, सैंपल और एक्सपायर्ड दवाएं भी बरामद हुई थीं। जांच के लिए 85 दवा नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

इसके अलावा विभाग ने 30 फार्मा कंपनियों को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब्त की गई दवाएं उनके उत्पादन की हैं या नहीं। जांच टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

इससे पहले पिछले साल भी एसटीएफ और औषधि विभाग ने संयुक्त कार्रवाई में पांच गोदामों पर छापेमारी कर ₹71 करोड़ की संदिग्ध दवाएं जब्त की थीं। उस मामले में एंटीबायोटिक, एलर्जी और गैस्ट्रिक समस्याओं की दवाएं शामिल थीं, जिन्हें पुदुचेरी में बनवाने की बात सामने आई थी।

फिलहाल इस नए खुलासे ने नकली दवा कारोबार के तरीके को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल ने इस अवैध कारोबार को और अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

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