नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक मामलों से कोई ठोस सबक नहीं लिया। इसी के साथ अदालत ने केंद्र सरकार, NTA और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें मेडिकल प्रवेश परीक्षा के संचालन के लिए NTA के स्थान पर एक अधिक मजबूत और स्वायत्त निकाय स्थापित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए पारदर्शी और प्रभावी ढांचा बेहद जरूरी है।
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जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने निर्देश दिया कि याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने NTA को यह भी निर्देश दिया कि वह 2024 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले भी न्यायालय के समक्ष आ चुका है, और उस समय गठित निगरानी समिति ने कई महत्वपूर्ण सिफारिशें दी थीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था। अदालत ने अब NTA से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और किस स्तर तक उनका पालन किया गया है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि NTA का पुनर्गठन किया जाए या उसे किसी मजबूत और स्वतंत्र संस्था से प्रतिस्थापित किया जाए। संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाई जाए, जो परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है और सभी समान मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। अदालत ने यह भी कहा कि इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित समिति को यह बताना होगा कि उसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही अदालत ने CBI से भी निर्देशित किया है कि वह पेपर लीक मामले की जांच पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस रिपोर्ट में जांच के नेटवर्क, गिरफ्तारियों की संख्या, आरोपियों की भूमिका और अभियोजन की प्रगति का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि NTA को यह निर्देश दिया जाए कि वह नीट-यूजी परीक्षा के परिणाम केंद्रवार तुरंत प्रकाशित करे, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते पहचाना जा सके। इसके अलावा परीक्षा सुरक्षा से जुड़े सभी तकनीकी और प्रशासनिक उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में पेपर लीक मामले के बाद परीक्षा रद्द करने से इनकार करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, सीसीटीवी निगरानी, उम्मीदवार सत्यापन, एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने जैसे उपाय शामिल थे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक परीक्षाओं को रद्द करने के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी अनियमितता की स्थिति में संतुलित और पारदर्शी निर्णय लिया जा सके। फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है, जिसमें सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
