कोयंबटूर। तमिलनाडु के कोयंबटूर में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक 63 वर्षीय फाउंड्री मालिक से साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर ₹20 लाख की ठगी कर ली। पीड़ित को पेईलामेडु क्षेत्र का निवासी बताया गया है, जिसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई में तैनात सीबीआई अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि पीड़ित के बैंक खाते का उपयोग अवैध वित्तीय लेनदेन में हुआ है और उसके नाम पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद ठग ने पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की धमकी देते हुए कहा कि वह घर से बाहर न निकले और पूरी तरह निगरानी में है।
डर और दबाव के माहौल में आरोपी ने पीड़ित को लगातार फोन पर निर्देश दिए और कहा कि जांच प्रक्रिया के नाम पर उसके बैंक खाते में मौजूद राशि को ‘वेरिफिकेशन अकाउंट’ में ट्रांसफर करना होगा। ठगों ने भरोसा दिलाया कि यह राशि जांच पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी, जिसके चलते पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन में ₹20 लाख ट्रांसफर कर दिए। कॉल करने वाले ने यह भी चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी से संपर्क न किया जाए और घर के अंदर ही सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। तीन दिनों तक जब आरोपी का कोई जवाब नहीं आया, तब पीड़ित को संदेह हुआ और उसने वापस कॉल करने की कोशिश की, लेकिन नंबर बंद मिला। इसके बाद जब उसने अपने परिचितों से जानकारी ली तो उसे एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। घटना की पुष्टि होने के बाद पीड़ित ने कोयंबटूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट स्कैम हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जिसमें ठग खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें मानसिक दबाव में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। इस प्रकार के मामलों में अपराधी पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत राशि ट्रांसफर करना जरूरी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी ठगी से बचने के लिए किसी भी अनजान कॉल पर बैंक डिटेल्स साझा नहीं करनी चाहिए और किसी भी सरकारी एजेंसी की कार्रवाई की पुष्टि सीधे आधिकारिक नंबरों से करनी चाहिए।
पीड़ित ने बताया कि कॉल के दौरान उसे लगातार दबाव में रखा गया और मानसिक रूप से इतना डराया गया कि वह किसी भी तरह का विरोध नहीं कर सका। फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी खातों तथा कॉल डिटेल्स की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि इस तरह की किसी भी कॉल पर तुरंत विश्वास न करें और किसी भी प्रकार के वित्तीय लेनदेन से पहले संबंधित बैंक या पुलिस हेल्पलाइन पर सत्यापन जरूर करें।
इस मामले ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ठग लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल ठगी के ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है और कई संदिग्ध खातों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और लोगों को अनजान कॉल, लिंक और बैंक संबंधी किसी भी निर्देश को तुरंत नजरअंदाज करना चाहिए। फिलहाल पुलिस ने तकनीकी जांच तेज कर दी है और इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क के पीछे मौजूद अन्य आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
