पुणे के एक उद्यमी को इंस्टाग्राम विज्ञापन के जरिए फंसाकर ₹70.8 लाख की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का अहमदाबाद में भंडाफोड़ हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए संचालित हो रहा था, जहां स्क्रिप्टेड बातचीत, फर्जी पहचान और तैयार बिज़नेस पिच के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता था।
पीड़ित ने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखा था, जिसमें “टैक्स-फ्री इनकम” और दुबई स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ बिज़नेस शुरू करने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद उसे एक ऑनलाइन फॉर्म भरने को कहा गया। जानकारी जमा करने के कुछ ही समय बाद उसे +971 (यूएई) नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को ‘दिया भट्ट’ बताया और बाद में ‘सानवी शाह’ नाम की एक अन्य महिला के साथ वीडियो कॉल कराई गई, जो खुद को कंपनी की अधिकृत प्रतिनिधि बता रही थीं।
वीडियो बातचीत के दौरान पीड़ित को फूड डिलीवरी, कार रेंटल और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर दिए गए। आरोपियों ने इस पूरी योजना को एक वैध अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस मॉडल के रूप में पेश किया और भरोसा जीतने की कोशिश की। धीरे-धीरे “सिक्योरिटी डिपॉजिट” के नाम पर अलग-अलग ट्रांजैक्शन में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। साथ ही पीड़ित से एक फर्जी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) भी साइन करवाया गया, ताकि भरोसा और मजबूत किया जा सके।
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ठगी को और विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने दुबई यात्रा का भी झांसा दिया, लेकिन बाद में इसे “मिडिल ईस्ट संघर्ष की स्थिति” का हवाला देकर रद्द कर दिया गया। इसी बहाने देरी कर लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए जाते रहे। जब तक पीड़ित को शक हुआ, तब तक वह कुल ₹70.8 लाख अलग-अलग लेनदेन में गंवा चुका था।
जांच एजेंसियों ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पूरे नेटवर्क को अहमदाबाद से संचालित पाया। आरोपी अंतरराष्ट्रीय कॉलर आईडी स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर खुद को दुबई स्थित कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस को विस्तृत स्क्रिप्ट, रोल-प्ले पहचान और बातचीत के फ्लोचार्ट मिले, जिनका इस्तेमाल कॉल सेंटर एजेंट करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा सिंडिकेट पहले से तैयार रिहर्सल स्क्रिप्ट पर काम करता था। हर संभावित सवाल का जवाब पहले से तय रहता था। एजेंट्स को कॉरपोरेट स्टाइल में बातचीत करने, तकनीकी बिज़नेस शब्दावली का इस्तेमाल करने और सुनियोजित तरीके से भरोसा बनाने की ट्रेनिंग दी जाती थी, ताकि पीड़ित को कोई शक न हो।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा फ्रॉड मॉडल ऑनलाइन विज्ञापनों, सोशल मीडिया लीड्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर आधारित था। पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय आउटसोर्सिंग सिस्टम में शामिल हो रहे हैं, जहां उन्हें नियमित आय, ग्लोबल क्लाइंट्स और लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे।
छापेमारी के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से एक ने फर्जी पहचान बनाकर ‘सानवी शाह’ के नाम से पीड़ितों से बातचीत की थी। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल कम्युनिकेशन रिकॉर्ड की गहन जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे फर्जी कॉल सेंटर अब और अधिक तकनीकी रूप से उन्नत हो रहे हैं और मानसिक दबाव व धोखे की रणनीति से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस ऑफर, हाई-रिटर्न निवेश स्कीम या वीडियो कॉल पर तुरंत भरोसा न करें और हर दावे की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से जरूर करें।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जागरूकता ही ऐसे फ्रॉड से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है, क्योंकि ठग लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं।
