अहमदाबाद के पॉश इलाके नवरंगपुरा स्थित ICICI बैंक शाखा में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक के करेंसी चेस्ट इंचार्ज हरसिद्ध कडियार पर आरोप है कि उसने बेहद सुनियोजित तरीके से बैंक की तिजोरी से ₹8.37 करोड़ की रकम गायब कर दी। आरोपी की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुड़े करेंसी चेस्ट की निगरानी और नकदी प्रबंधन की थी, लेकिन जांच में सामने आया कि उसने इसी भरोसे का फायदा उठाकर लंबे समय तक बैंक से पैसे निकालने का खेल जारी रखा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब RBI और बैंक मुख्यालय की ओर से शाखा में अचानक इंटरनल ऑडिट किया गया। ऑडिट टीम ने सिस्टम रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी का मिलान किया, जिसमें करोड़ों रुपये की भारी कमी पाई गई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
छोटी-छोटी रकम निकालकर किया बड़ा घोटाला
जांच एजेंसियों के अनुसार, हरसिद्ध कडियार ने किसी बड़े एकमुश्त फ्रॉड के बजाय धीरे-धीरे रकम निकालने की रणनीति अपनाई। वह रोजाना तिजोरी से थोड़ी-थोड़ी नकदी अपने बैग में भरकर बाहर ले जाता था ताकि किसी को तुरंत शक न हो।
सिर्फ नकदी चोरी ही नहीं, बल्कि आरोपी ने बैंक के अकाउंट रिकॉर्ड और कंप्यूटर सिस्टम में फर्जी एंट्रियां भी कीं। इससे ऑडिट और कैश बैलेंस में गड़बड़ी तुरंत सामने नहीं आ सकी। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरा फ्रॉड बेहद तकनीकी और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
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चोरी के पैसों से खरीदा करोड़ों का बंगला और दुकान
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने चोरी की रकम से अहमदाबाद के एक पॉश इलाके में लगभग ₹2 करोड़ का आलीशान बंगला खरीदा। इसके अलावा उसने करीब ₹1 करोड़ की एक कमर्शियल दुकान भी बुक कराई थी।
जांच एजेंसियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में आरोपी की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया था। महंगी गाड़ियां, लग्जरी खर्च और हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया।
सरप्राइज ऑडिट ने खोली पूरे खेल की पोल
मामले का सबसे अहम मोड़ तब आया जब बैंक और RBI की संयुक्त ऑडिट टीम ने शाखा का निरीक्षण किया। कैश वेरिफिकेशन के दौरान तिजोरी में ₹8.37 करोड़ की कमी मिलने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद नवरंगपुरा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में उसने कथित तौर पर गबन की बात स्वीकार कर ली है। फिलहाल पुलिस उसके बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही बंगले और दुकान को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की जरूरत को उजागर करता है।
