नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नौकरी दिलाने का लालच देकर युवाओं के पहचान दस्तावेज हासिल करने और उनके नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी कंपनियां खड़ी करने वाले बड़े GST घोटाले का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध शाखा की जांच में सामने आया कि संगठित गिरोह ने करीब 250 शेल कंपनियां बनाकर ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी कारोबार को अंजाम दिया। आरोप है कि नकली बिलिंग, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपये का वित्तीय फर्जीवाड़ा किया गया। मामले ने डिजिटल GST सिस्टम और पहचान सत्यापन प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब जनवरी में GST विभाग की टीम उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में रहने वाले 25 वर्षीय युवक अंकुश के घर पहुंची। अधिकारियों ने परिवार को बताया कि अंकुश के नाम पर ‘आर के एंटरप्राइजेज’ नामक एक फर्म रजिस्टर्ड है, जिसने कुछ ही महीनों में ₹128 करोड़ का कारोबार दिखाया है, लेकिन संबंधित टैक्स जमा नहीं कराया गया। यह जानकारी सुनकर परिवार हैरान रह गया, क्योंकि अंकुश किसी व्यवसाय से जुड़ा ही नहीं था और वह एक कोचिंग संस्थान में अनुबंध आधारित नौकरी कर रहा था।
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अंकुश ने बाद में पुलिस को बताया कि बेरोजगारी के दौरान उसके एक परिचित ने GST विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसी बहाने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज लिए गए थे। जांच एजेंसियों को बाद में पता चला कि उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई गई और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को दिल्ली के दरियागंज इलाके से संचालित एक बड़े सिंडिकेट की जानकारी मिली। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड राज कुमार दीक्षित, उसका भाई और कई सहयोगी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह पिछले कई वर्षों से बेरोजगार युवाओं, गरीब लोगों और नौकरी तलाशने वालों को निशाना बनाकर उनके दस्तावेज इकट्ठा कर रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह फर्जी GST फर्म बनाकर नकली बिल तैयार करता था और कागजों पर ऐसे व्यापारिक लेनदेन दिखाए जाते थे, जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं। इन फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जाता था। इसके अलावा नकद लेनदेन को वैध कारोबार के रूप में दिखाने और संदिग्ध धन को बैंकिंग सिस्टम में घुमाने के लिए भी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ऐसे कारोबारियों को तलाशता था जिनके यहां भारी मात्रा में नकद लेनदेन होता था। नकद रकम को वैध बैंक ट्रांजैक्शन की तरह दिखाने के लिए शेल कंपनियों के खातों का इस्तेमाल किया जाता था और बदले में कमीशन काटकर नकदी पहुंचाई जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस तरीके से करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन को वैध रूप देने की कोशिश की गई।
अधिकारियों के अनुसार, कई आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹15,000 से ₹20,000 तक का लालच देकर उनके बैंक खाते और दस्तावेज हासिल किए गए। इन्हीं खातों के जरिए फर्जी GST ट्रांजैक्शन और टैक्स क्रेडिट क्लेम किए जाते थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क का दायरा दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है।
साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर संगठित गिरोह अब नए प्रकार के आर्थिक अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, पहचान दस्तावेजों की चोरी, फर्जी कंपनियों का निर्माण और डिजिटल टैक्स सिस्टम का दुरुपयोग आने वाले समय में वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उनका कहना है कि साइबर वेरिफिकेशन, बायोमेट्रिक सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट सिस्टम को मजबूत किए बिना ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल होगा।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, संदिग्ध बैंक खातों और फर्जी कंपनियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक फर्जी फर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले बड़े टैक्स चोरी और हवाला जैसे वित्तीय नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।
