फर्जी ICICI सिक्योरिटीज ट्रेडिंग स्कैम का खुलासा: अहमदाबाद में L&T मैनेजर से व्हाट्सऐप इन्वेस्टमेंट जाल के जरिए ₹74 लाख की ठगी

Team The420
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अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर ICICI सिक्योरिटीज से जुड़े निवेश सलाहकार बनकर Larsen & Toubro Construction Ltd में कार्यरत 52 वर्षीय मैनेजर को ₹74 लाख से अधिक की चपत लगा दी। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल, नकली SEBI दस्तावेज और व्हाट्सऐप इन्वेस्टमेंट ग्रुप का इस्तेमाल कर पीड़ित को यह भरोसा दिलाया कि वह एक वैध और सुरक्षित शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश कर रहा है।

साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, पीड़ित लक्ष्मण नटराजन साबरमती क्षेत्र में रहते हैं और मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं। कथित ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब उन्हें एक अनजान नंबर के जरिए “ICICI Securities S05” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। पुलिस के अनुसार, ग्रुप में शेयर बाजार से जुड़े संदेश, निवेश टिप्स और ट्रेडिंग सलाह लगातार साझा की जाती थीं, ताकि लोगों को यह लगे कि यह किसी अधिकृत वित्तीय सलाहकार नेटवर्क का हिस्सा है।

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जांच में सामने आया कि ग्रुप में मौजूद कुछ लोगों ने खुद को “अश्विन पारेख” और “प्राची श्रीवास्तव” बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने कथित तौर पर पीड़ित को ऐसी वेबसाइटों के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जो देखने में ICICI सिक्योरिटीज के आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसी लगती थीं। आरोपियों ने “iciciqio.com” और “icici-qib.com” जैसे संदिग्ध लिंक साझा किए और पीड़ित को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित से आधार कार्ड, PAN कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और निवेश संबंधी प्राथमिकताएं जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी गई। भरोसा मजबूत करने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर नकली SEBI लोगो वाले जाली दस्तावेज, फर्जी प्रमाणपत्र और निवेश स्वीकृति पत्र भी साझा किए। पीड़ित को शेयर ट्रेडिंग के जरिए 15 से 25 प्रतिशत तक रिटर्न देने का दावा किया गया था।

शिकायत के अनुसार, शुरुआत में पीड़ित ने ₹10,000 की छोटी राशि निवेश की थी। इसके बाद उसे फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड पर मामूली मुनाफा दिखाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पीड़ित का भरोसा जीतने की सोची-समझी रणनीति थी। शुरुआती लाभ देखने के बाद पीड़ित को प्लेटफॉर्म असली लगा और उसने धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करनी शुरू कर दी।

पुलिस के मुताबिक, 18 दिसंबर से 18 जनवरी के बीच पीड़ित ने 62 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹74.02 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए। कथित ठगी तब सामने आई जब पीड़ित ने निवेश की गई राशि और मुनाफा निकालने की कोशिश की। आरोपियों ने पहले भुगतान में देरी की और बाद में अचानक संपर्क बंद कर दिया।

इसके बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी मामला दर्ज कराया। बाद में अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया। पुलिस अब मामले से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है।

सायबर जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरह की ठगी अब पहले से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है। अपराधी क्लोन वेबसाइट, नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड और सोशल मीडिया आधारित निवेश ग्रुप का इस्तेमाल कर लोगों को तेजी से मुनाफे का लालच देते हैं। कई मामलों में फर्जी स्क्रीनशॉट, नकली प्रॉफिट रिपोर्ट और बनावटी निवेश सफलता की कहानियों के जरिए लोगों का भरोसा जीता जाता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल निवेश के बढ़ते चलन का फायदा उठा रहे हैं। उनका कहना है कि “ठग शुरुआत में मामूली लाभ दिखाकर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। फर्जी SEBI मंजूरी, क्लोन ट्रेडिंग वेबसाइट और नकली डैशबोर्ड अब संगठित निवेश ठगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं।”

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, डोमेन, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की पूरी जांच करें। विशेषज्ञों ने अनजान वेबसाइटों पर निजी वित्तीय दस्तावेज साझा करने और सोशल मीडिया आधारित निवेश समूहों से जुड़ने में भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

फिलहाल अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ठगी किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जुड़ी है या नहीं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में म्यूल बैंक खाते और फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर रकम को अलग-अलग स्तर पर खपाया गया है।

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