अहमदाबाद में बुलियन कारोबारी की पहचान का इस्तेमाल कर ₹75 लाख की कथित ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

बैंककर्मी बनकर व्यापारी से ₹4.52 लाख की साइबर ठगी: फर्जी बीमा पॉलिसी के नाम पर खाते से उड़ाई रकम

Team The420
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक व्यवसायी को बैंककर्मी बनकर साइबर ठगों द्वारा लाखों रुपये की चपत लगाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शातिर साइबर अपराधी ने खुद को बैंक ऑफ बड़ौदा का कर्मचारी बताकर व्यापारी को झांसे में लिया और दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल ₹4.52 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए निकाल लिए। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत अपने बैंक कार्ड ब्लॉक करवाए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, प्रयागराज के अल्लापुर निवासी व्यवसायी धर्मेंद्र सिंह के बैंक ऑफ बड़ौदा और कोटक महिंद्रा बैंक में खाते हैं। पीड़ित के मुताबिक, उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ बड़ौदा का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके खाते से जुड़ी एक बीमा पॉलिसी सक्रिय है, जिसके तहत हर महीने ₹4,000 का भुगतान कटेगा।

धर्मेंद्र सिंह ने जब इस पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्होंने ऐसी कोई बीमा पॉलिसी नहीं ली है, तब कथित बैंककर्मी ने उन्हें तुरंत प्रक्रिया रोकने का भरोसा दिया। आरोप है कि इसके बाद साइबर ठग ने उन्हें एक लिंक भेजा और कथित बैंकिंग एप डाउनलोड करने के लिए कहा। हालांकि व्यवसायी ने एप डाउनलोड करने से इनकार कर दिया, लेकिन बातचीत के दौरान आरोपी ने उन्हें झांसे में लेकर बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी अहम जानकारी हासिल कर ली।

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कुछ ही देर बाद धर्मेंद्र सिंह के दोनों बैंक खातों से अलग-अलग किस्तों में कुल ₹4.52 लाख रुपये निकल गए। बैंक से ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत दोनों खातों के क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करवाए और स्थानीय थाने में शिकायत दी।

जार्जटाउन थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल की मदद से मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ट्रांजैक्शन डिटेल्स की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर पीड़ित का भरोसा जीता और संवेदनशील बैंकिंग जानकारी हासिल की।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले ठगों के मामले तेजी से बढ़े हैं। अपराधी अक्सर बीमा पॉलिसी, केवाईसी अपडेट, कार्ड ब्लॉक होने, रिवॉर्ड पॉइंट या खाते के सत्यापन जैसे बहाने बनाकर लोगों को डराते या भ्रमित करते हैं। इसके बाद वे लिंक भेजकर फर्जी एप डाउनलोड करवाने या बैंकिंग डिटेल्स साझा कराने की कोशिश करते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब तकनीकी हैकिंग से ज्यादा सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रहे हैं। लोगों को मानसिक दबाव और जल्दबाजी में डालकर उनसे OTP, कार्ड नंबर, CVV, इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल की जाती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें और किसी संदिग्ध लिंक या एप को डाउनलोड करने से बचें।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बैंक कभी भी फोन कॉल पर ग्राहकों से पूरा कार्ड नंबर, CVV, OTP या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगते। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए। किसी भी तरह की शंका होने पर सीधे बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

पुलिस का कहना है कि मामले में डिजिटल ट्रेल की जांच जारी है और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी की किसी भी घटना की तुरंत सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को दें, ताकि समय रहते रकम को ट्रेस और फ्रीज किया जा सके।

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