अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस ने एक ऐसे कथित ‘लव स्कैमर’ को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को गुजरात पुलिस की साइबर क्राइम विंग में तैनात पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) बताकर कई महिलाओं को अपने जाल में फंसाया। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने मैट्रिमोनियल और डेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर नकली प्रोफाइल बनाकर कम से कम 21 महिलाओं से कथित तौर पर ठगी की। आरोप है कि वह AI से तैयार तस्वीरों, फर्जी सरकारी दस्तावेजों और मनगढ़ंत कहानियों का इस्तेमाल कर महिलाओं का भरोसा जीतता था और बाद में उनसे पैसे ऐंठ लेता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान हिमांशु उर्फ रॉकी पांचाल के रूप में हुई है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उसे राजस्थान के उदयपुर से गिरफ्तार किया, जहां वह कथित तौर पर छिपकर रह रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से Shaadi.com, Jeevansathi, Bumble और Hinge जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी पहचान के साथ सक्रिय था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को गुजरात पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट में कार्यरत अधिकारी बताता था। वह सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल साइट्स पर महिलाओं से संपर्क करता, फिर धीरे-धीरे व्यक्तिगत और भावनात्मक बातचीत के जरिए उनका विश्वास जीतता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी रिश्ते और शादी का भरोसा देकर महिलाओं को भावनात्मक रूप से अपने प्रभाव में ले लेता था।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने AI आधारित इमेज टूल्स और एडिटिंग एप्स की मदद से पुलिस वर्दी में अपनी फर्जी तस्वीरें तैयार की थीं। इसके अलावा उसने कथित तौर पर नकली सरकारी पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र, निलंबन नोटिस और विभागीय दस्तावेज भी बनाए थे। अधिकारियों के मुताबिक, इन दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए डिजिटल स्टैंप और डिजाइन टूल्स का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिलाओं से पैसे लेने के लिए अलग-अलग कहानियां गढ़ता था। कई मामलों में वह दावा करता कि वह किसी कानूनी विवाद में फंस गया है, विभागीय जांच का सामना कर रहा है या फिर उसका बैंक खाता अस्थायी रूप से फ्रीज हो गया है। कुछ मामलों में उसने आयकर विभाग की छापेमारी और सरकारी कार्रवाई से जुड़े नकली नोटिस भी भेजे। इन दावों पर भरोसा कर कई महिलाओं ने कथित तौर पर उसे बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी केवल गुजरात ही नहीं बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की महिलाओं को भी निशाना बना चुका है। मामले का खुलासा तब हुआ जब अहमदाबाद के नरोडा और नवरंगपुरा क्षेत्रों की कुछ महिलाओं ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों में समान तरीके से ठगी और नकली पुलिस अधिकारी बनकर धोखा देने की बात सामने आई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने तकनीकी जांच शुरू की।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में “रोमांस स्कैम” और “लव फ्रॉड” के मामलों में तेजी आई है। अपराधी सोशल मीडिया, डेटिंग एप्स और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों की भावनाओं का फायदा उठाते हैं। कई मामलों में AI आधारित फोटो, वीडियो और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नकली पहचान को विश्वसनीय बनाया जाता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी हैकिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सोशल इंजीनियरिंग और भावनात्मक हेरफेर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी ऑनलाइन रिश्ते में आर्थिक लेनदेन से पहले व्यक्ति की पहचान और दावों का स्वतंत्र सत्यापन बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया या मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स पर मिले किसी व्यक्ति के सरकारी पद, नौकरी या पहचान संबंधी दावों पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति बार-बार आर्थिक मदद मांगता है, कानूनी संकट की कहानी सुनाता है या तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाता है, तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए। पुलिस ने कहा है कि मामले में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है तथा आगे की जांच जारी है।
