लुधियाना। पंजाब के लुधियाना में सरकारी ट्रांसपोर्ट टेंडर दिलाने के नाम पर ₹11 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के जलालाबाद गोदाम में ट्रांसपोर्टेशन (लोडिंग-अनलोडिंग) का ठेका दिलाने का झांसा देकर एक कारोबारी से बड़ी रकम हड़प ली गई। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह शिकायत पहले पंजाब के डायरेक्टर, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, चंडीगढ़ को दी गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे की कार्रवाई के लिए थाना सलेम टाबरी पुलिस को भेजा गया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता मनवीर सिंह ढिल्लों, निवासी गांव कासाबाद (लुधियाना), ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली संपर्कों वाला बताते हुए दावा किया कि वे उसे FCI जलालाबाद गोदाम में ट्रांसपोर्ट टेंडर दिलवा सकते हैं। आरोप है कि आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए सरकारी प्रक्रिया में पहुंच और पहचान का हवाला दिया।
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शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने टेंडर प्रक्रिया में मदद करने के नाम पर ₹11 लाख की मांग की थी। कारोबारी ने भरोसे में आकर यह रकम उन्हें दे दी। लेकिन न तो कोई टेंडर मिला और न ही पैसे वापस किए गए। बाद में जब शिकायतकर्ता ने लगातार संपर्क किया, तो उसे टालमटोल जवाब मिलने लगे और धीरे-धीरे संपर्क भी कम हो गया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने कथित रूप से मिलकर एक योजनाबद्ध तरीके से शिकायतकर्ता को गुमराह किया। दावा है कि टेंडर दिलाने के नाम पर भरोसा दिलाने के बाद रकम ले ली गई और फिर पूरी प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी दी जाती रही।
पुलिस ने जिन दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, उनकी पहचान अनमोल रतन सिंह और बलकरण सिंह भट्टी के रूप में हुई है, जो मोहाली के फेज-7 इलाके के निवासी बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की शुरुआती जांच चल रही है और बैंक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों द्वारा इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा देकर ठगी की गई हो सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मामले में कोई और व्यक्ति या नेटवर्क भी शामिल है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकारी टेंडर और सप्लाई से जुड़े मामलों में अक्सर ऐसे गिरोह सक्रिय रहते हैं जो लोगों को प्रभाव और पहुंच का झांसा देकर पैसे ऐंठते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि भुगतान के बाद निश्चित रूप से ठेका मिल जाएगा, जो बाद में पूरी तरह फर्जी साबित होता है।
पुलिस ने आम लोगों और व्यापारियों को सतर्क रहने की अपील की है कि किसी भी सरकारी टेंडर या कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर बिना आधिकारिक प्रक्रिया और दस्तावेजों के पैसे न दें। खासकर ऐसे मामलों में जहां अग्रिम भुगतान की मांग की जाए, वहां सावधानी बरतना जरूरी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच के नतीजों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ और सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
