नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार के करीब ₹504 करोड़ के कथित फंड गबन मामले में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस बड़ी कार्रवाई में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं। मामला सरकारी खातों से कथित रूप से संगठित तरीके से धनराशि के गबन से जुड़ा है, जिसमें बैंकिंग सिस्टम के भीतर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के कुल छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो शेल कंपनियां, उनके डायरेक्टर और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मिलीभगत कर सरकारी खातों से धन निकालने और उसे संदिग्ध लेनदेन के जरिए आगे ट्रांसफर करने में भूमिका निभाई।
CBI ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती चार्जशीट है और जांच अभी जारी है। आने वाले समय में और आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की जा सकती है, क्योंकि वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
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यह मामला तब सामने आया जब 2026 की शुरुआत में सरकारी खातों के बैंकिंग ट्रांसफर के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक बैलेंस में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद विभिन्न विभागों के खातों की ऑडिट शुरू की गई, जिसमें कई अनियमितताएं उजागर हुईं। शुरुआती जांच के बाद मामला गंभीर मानते हुए इसे विस्तृत जांच एजेंसियों को सौंप दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक शाखाओं और सरकारी विभागों के बीच कथित तौर पर समन्वित कार्रवाई के जरिए फंड ट्रांसफर किया गया। इससे सरकारी धन को अलग-अलग खातों और संस्थाओं के माध्यम से घुमाकर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की गई।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बैंक रिकॉर्ड और सरकारी खातों के विवरण में बार-बार असमानताएं थीं, जिससे संदेह और गहरा गया। इसके बाद पूरे मामले की फोरेंसिक ऑडिट शुरू की गई और कई राज्यों तक जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
CBI ने बताया कि सभी 15 आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इनके खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी, विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
जांच एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि आगे चलकर और सरकारी विभागों और वित्तीय संस्थानों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। कुछ मामलों में शेल कंपनियों के जरिए धन को घुमाने और छिपाने के संकेत मिले हैं, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की संभावना भी जांच के दायरे में आ गई है।
इसी बीच, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े घोटालों में अक्सर सिस्टम के भीतर मौजूद लोग बाहरी नेटवर्क के साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में रियल-टाइम मॉनिटरिंग, मजबूत ऑडिट ट्रेल और मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की जरूरत है।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और संचार डेटा की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
