हैदराबाद। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच साइबराबाद पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले “म्यूल बैंक अकाउंट्स” की सप्लाई कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने 27 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि वह विभिन्न राज्यों में साइबर फ्रॉड के लिए बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध कराता था। जांच में यह भी सामने आया है कि ये खाते ट्रेडिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट स्कैम, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर होने वाली ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान दिलीप सिंह के रूप में हुई है, जो राजस्थान के नागौर जिले का रहने वाला है और वर्तमान में मेडचल-मलकाजगिरी जिले के आईडीए जीडीमेटला क्षेत्र में रहता था। वह एक डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता था, लेकिन अतिरिक्त कमाई के लालच में साइबर अपराधियों के संपर्क में आ गया।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी की मुलाकात 2024 में इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन के जरिए कुछ अज्ञात व्यक्तियों से हुई थी। इन लोगों ने उसे बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने के बदले मोटे कमीशन का लालच दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी को प्रति सेविंग अकाउंट ₹25,000 और करंट अकाउंट के लिए ₹50,000 तक का भुगतान करने का वादा किया गया था।
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साइबर क्राइम पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने बाद में अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप नंबरों के जरिए “जॉर्डन” और “पिंटू भैया” नामक व्यक्तियों से संपर्क बनाए रखा। इसके बाद वह खुद और अन्य लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों को साइबर ठगों को उपलब्ध कराने लगा। इन खातों के साथ एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, पासबुक और चेकबुक भी अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते थे, ताकि ठगी से प्राप्त धन को तेजी से ट्रांसफर किया जा सके।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से ₹1.02 लाख नकद, तीन मोबाइल फोन, 12 डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, तीन बैंक पासबुक और सात चेकबुक बरामद किए। इसके अलावा 33 बैंक दस्तावेज भी जब्त किए गए, जो कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने थे।
जांच अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। पहले लोगों को छोटे कमीशन का लालच देकर बैंक अकाउंट खोले जाते थे, फिर उन खातों को साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है, जो खातों को सक्रिय कराने और दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद कर रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह के म्यूल अकाउंट साइबर ठगी की रीढ़ बन चुके हैं। इन खातों के जरिए ठग आसानी से पीड़ितों से ठगे गए पैसे को कई लेयर में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए धन की ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।
साइबर क्राइम अधिकारियों ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी स्थिति में अपने बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स किसी अन्य व्यक्ति को न दें, चाहे बदले में कितना भी पैसा क्यों न ऑफर किया जाए। ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा कितने बैंक खातों का इस्तेमाल अब तक साइबर ठगी में किया जा चुका है।
