सिंगापुर। टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Meta ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर वैश्विक छंटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस नए दौर में करीब 8,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर कंपनी के एशियाई हब सिंगापुर पर देखने को मिल रहा है, जहां से कई प्रमुख इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीमों को प्रभावित किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह कदम कंपनी की वैश्विक पुनर्गठन रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संचालन लागत को कम करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तथा कोर प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर अधिक फोकस करना है। कंपनी पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपने कार्यबल को पुनर्संयोजित कर रही है, ताकि बदलते डिजिटल बाजार और प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी स्थिति मजबूत रख सके।
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ताजा छंटनी में खास तौर पर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट टीमों पर असर पड़ने की बात सामने आई है। इन विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को या तो भूमिका परिवर्तन का विकल्प दिया जा रहा है या फिर उनके पद समाप्त किए जा रहे हैं। कंपनी का मानना है कि मौजूदा संरचना में कुछ पद ऐसे हैं जो दोहराव वाले कार्य कर रहे थे, जिन्हें अब ऑटोमेशन और AI आधारित सिस्टम के जरिए संभाला जा सकता है।
सिंगापुर, जिसे Singapore में कंपनी का प्रमुख एशियाई संचालन केंद्र माना जाता है, इस छंटनी से विशेष रूप से प्रभावित बताया जा रहा है। यहां स्थित दफ्तर न सिर्फ क्षेत्रीय प्रबंधन का केंद्र है, बल्कि कई वैश्विक उत्पादों और तकनीकी प्रोजेक्ट्स का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस फैसले का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों को कंपनी की ओर से रिडंडेंसी पैकेज और कुछ मामलों में री-स्किलिंग सपोर्ट देने की भी योजना है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में छंटनी ने टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर रोजगार स्थिरता और भविष्य की नौकरी सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दर्शाता है कि बड़ी टेक कंपनियां अब आक्रामक लागत कटौती और दक्षता सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, विज्ञापन राजस्व में उतार-चढ़ाव और एआई निवेश की बढ़ती लागत ने कंपनियों को अपने ढांचे को फिर से संतुलित करने के लिए मजबूर किया है।
कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस छंटनी का उद्देश्य केवल लागत में कटौती नहीं है, बल्कि संगठन को अधिक चुस्त और AI-फोकस्ड बनाना भी है। कंपनी अब उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है जहां भविष्य में विकास की अधिक संभावनाएं हैं, जैसे जनरेटिव AI, मेटावर्स तकनीक और एडवांस्ड डेटा सिस्टम।
हालांकि, कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि बार-बार हो रही छंटनी ने कार्यस्थल की स्थिरता को प्रभावित किया है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह टेक इंडस्ट्री के उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसमें मानव-आधारित कार्यों की जगह तेजी से ऑटोमेशन ले रहा है।
बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि Meta का यह कदम अन्य बड़ी टेक कंपनियों के लिए भी एक संकेत है कि आने वाले समय में कार्यबल संरचना में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषकर उन कंपनियों में जो डिजिटल विज्ञापन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं।
फिलहाल कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत देश-वार आंकड़े साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन संकेत यही हैं कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र इस छंटनी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र है। आने वाले दिनों में इस फैसले के और प्रभाव सामने आने की उम्मीद है, खासकर तकनीकी भर्ती और प्रोजेक्ट विस्तार योजनाओं पर।
