WFI की आधार-OTP आधारित जांच में जन्मतिथि हेरफेर के आरोप सामने आने के बाद अंडर-17 राष्ट्रीय टूर्नामेंट से 125 से अधिक पहलवान अयोग्य घोषित

एक OTP, एक भरोसा और ₹7 करोड़ का नुकसान: GST फ्रॉड ने खोली साइबर सुरक्षा की पोल

Team The420
5 Min Read

मुंबई। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन टैक्स सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें केवल एक OTP और लंबे समय तक बनाए गए भरोसे के सहारे एक महिला की कंपनी के GST खाते से करीब ₹7 करोड़ की हेराफेरी कर ली गई। यह मामला मुंबई के मालाड क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पीड़िता के व्यवसायिक दस्तावेजों और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर संगठित तरीके से फर्जी लेनदेन और नकली इनवॉइस का पूरा नेटवर्क तैयार किया गया।

इस मामले में आरोपी की पहचान Bharat Singh alias Johnny के रूप में हुई है, जिस पर आरोप है कि उसने पहले पीड़िता के पति से संपर्क बनाकर भरोसा हासिल किया और बाद में उसी संबंध का फायदा उठाकर पूरे परिवार को अपने जाल में फंसा लिया। शिकायतकर्ता Sonia Ambavat का कहना है कि उनके पति ने ही आरोपी से परिचय कराया था, जिसने खुद को व्यवसायिक लोन और फूड ट्रक बिजनेस में मदद करने वाला व्यक्ति बताया था।

FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort

सूत्रों के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद आरोपी लगातार परिवार के संपर्क में बना रहा और घरेलू खर्च, बच्चे की फीस तथा अन्य जरूरतों में सहायता का भरोसा देकर धीरे-धीरे विश्वास मजबूत करता गया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने कथित रूप से कंपनी के GST सर्टिफिकेट, लॉगिन आईडी, पासवर्ड और OTP तक हासिल कर लिया। इसके बाद कंपनी से जुड़े मोबाइल नंबर और SIM कार्ड तक उसकी पहुंच बन गई, जिससे पूरा डिजिटल कंट्रोल उसके हाथ में चला गया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब GST पोर्टल पर पासवर्ड बदलने का अलर्ट पीड़िता को मिला। संदेह बढ़ने पर जब रिकॉर्ड की गहराई से जांच की गई तो पता चला कि कंपनी के नाम पर बड़ी संख्या में फर्जी इनवॉइस जनरेट किए गए हैं। इन नकली लेनदेन के आधार पर भारी कर देनदारी और संदिग्ध व्यापारिक गतिविधियां दिखाई गईं, जिनकी कुल राशि लगभग ₹7 करोड़ तक पहुंच गई।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने केवल सिस्टम एक्सेस तक सीमित काम नहीं किया, बल्कि फर्जी व्यापार को वास्तविक दिखाने के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया। इन खातों का संबंध Visakhapatnam क्षेत्र से भी पाया गया है, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

पीड़िता ने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से जब पूरे लेनदेन की जांच कराई तो खुलासा हुआ कि कई ट्रांजैक्शन वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों से मेल ही नहीं खाते। दस्तावेजों और GST रिकॉर्ड के विश्लेषण में स्पष्ट हुआ कि पूरा ढांचा फर्जी बिलिंग और डिजिटल धोखाधड़ी पर आधारित था।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि आरोपी ने लंबे समय तक भावनात्मक भरोसा बनाए रखा और उसी भरोसे को हथियार बनाकर डिजिटल एक्सेस प्राप्त किया। इसी दौरान OTP आधारित सत्यापन और लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर लगातार सिस्टम में बदलाव किए जाते रहे।

इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज के समय में सबसे बड़ा खतरा तकनीक नहीं बल्कि मानवीय विश्वास का दुरुपयोग है। OTP, पासवर्ड और लिंक साझा करना जितना सामान्य होता जा रहा है, उतना ही यह साइबर अपराधियों के लिए आसान प्रवेश द्वार बनता जा रहा है। ऐसे मामलों में अपराधी तकनीकी कमजोरी से ज्यादा सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि वह कब अपने ही डेटा को हमलावर के हवाले कर चुका है।”

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और फर्जी इनवॉइस नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ है। साथ ही बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि डिजिटल युग में एक OTP, एक भरोसा और एक छोटी सी लापरवाही भी करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन सकती है, और साइबर सुरक्षा में जरा सी चूक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article