वाराणसी में फर्जी APK फाइल इंस्टॉल कराकर साइबर अपराधियों ने मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल किया और क्रेडिट कार्ड से ₹6.31 लाख की ठगी की।

मदुरै से कंबोडिया तक फैला रैकेट: रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहा था साइबर स्कैम सेंटर सप्लाई चेन

Team The420
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तमिलनाडु के मदुरै से लेकर कंबोडिया तक फैले एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर फ्रॉड नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क में भारतीय नागरिकों को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा जाता था, जहां उन्हें कथित साइबर स्कैम कंपाउंड्स में बंधक बनाकर ऑनलाइन ठगी के काम में मजबूर किया जाता था। साइबर क्राइम विंग ने इस मामले में 35 वर्षीय मधन वडिवेल को गिरफ्तार किया है, जिसे इस पूरे रैकेट का एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

पुलिस जांच के अनुसार यह पूरा नेटवर्क केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ट्रैवल एजेंट्स, इमिग्रेशन फसिलिटेटर्स, टैक्सी ड्राइवर्स और विदेशों में सक्रिय स्कैम सेंटर संचालकों की एक संगठित श्रृंखला शामिल थी। यह नेटवर्क कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक फैला हुआ था और पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों भारतीयों को इसके जरिए विदेश भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके सहयोगी युवाओं को आकर्षक वेतन और बेहतर नौकरी का लालच देकर विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया संभालते थे। पीड़ितों के यात्रा दस्तावेज तैयार किए जाते थे और उन्हें कंबोडिया पहुंचने के बाद सीधे साइबर स्कैम कंपाउंड्स को सौंप दिया जाता था। वहां उन्हें “साइबर स्लेवरी” जैसी परिस्थितियों में रखकर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जाता था।

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एक पीड़ित, जो तिरुपत्तूर जिले का निवासी है, ने पुलिस को बताया कि उसे कंबोडिया में नौकरी का झांसा दिया गया था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे एक बंद कंपाउंड में रखा गया और साइबर फ्रॉड गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया। किसी तरह वह वहां से भागने में सफल रहा और भारतीय दूतावास की मदद से स्वदेश लौट आया, जिसके बाद इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपी मधन वडिवेल ने कंबोडिया में ‘जल्लीकट्टू’ नाम से कई रेस्टोरेंट भी चलाए थे। पुलिस के अनुसार इन रेस्टोरेंट्स का इस्तेमाल केवल व्यापारिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि स्कैम कंपाउंड्स में फंसे भारतीयों को भोजन उपलब्ध कराने और नेटवर्क को बनाए रखने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह हर भर्ती और ट्रैफिकिंग केस पर कमीशन प्राप्त करता था, जिससे इस अवैध नेटवर्क को आर्थिक मजबूती मिलती थी।

साइबर क्राइम विंग ने आरोपी को मदुरै से गिरफ्तार किया है और उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और पासपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन सभी को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच की जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल साइबर फ्रॉड नहीं बल्कि संगठित मानव तस्करी का गंभीर उदाहरण है, जहां डिजिटल अपराध और अंतरराष्ट्रीय भर्ती नेटवर्क एक साथ मिलकर काम कर रहे थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस रैकेट के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को विदेश भेजकर उन्हें साइबर अपराधों में फंसाया गया।

इस बीच साइबर क्राइम विंग की वरिष्ठ अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के किसी भी प्रस्ताव को केवल सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों और आधिकारिक पोर्टलों के माध्यम से ही सत्यापित करें। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और अनजान ऑनलाइन संपर्कों से मिलने वाले नौकरी प्रस्तावों पर भरोसा न करने की भी चेतावनी दी गई है।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, डिजिटल ट्रेल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस “साइबर स्लेवरी” रैकेट के जरिए अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया और इसके पीछे और कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।

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