गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित नवयुग मार्केट पोस्ट ऑफिस में फर्जी आधार कार्ड बनाने और उसमें अवैध संशोधन करने वाले एक संगठित गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों दीपक कुमार और विकास कुमार को गिरफ्तार किया है, जो हापुड़ के धौलाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने इनके पास से चार मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 42 फर्जी सेना पेंशन दस्तावेज और कई जाली जन्म प्रमाण पत्र बरामद किए हैं।
जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क पिछले लगभग एक वर्ष से सक्रिय था और एक संगठित तरीके से पहचान दस्तावेजों में हेरफेर का काम कर रहा था। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह की कड़ी तक पहुंचा जा सके।
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू पोस्ट ऑफिस की एक महिला कर्मचारी की कथित संलिप्तता है। पुलिस पूछताछ में ‘कोमल’ नामक महिला कर्मचारी का नाम सामने आया है, जो पोस्ट ऑफिस सिस्टम का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों को आधार डेटाबेस में अपलोड करने का कार्य करती थी। आरोप है कि वह प्रति आधार अपडेट के बदले ₹250 की रिश्वत लेती थी। फिलहाल आरोपी महिला फरार है और उसकी तलाश जारी है।
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पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने पंचवटी क्षेत्र स्थित थापर बिल्डिंग में ‘बालाजी’ नाम से एक फर्जी जनसेवा केंद्र भी चला रखा था। यहां जरूरतमंद और अनजान लोगों से आधार अपडेट और दस्तावेज सुधार के नाम पर ₹3,500 से ₹4,000 तक वसूले जाते थे। इसके बाद इन्हीं फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर नाम, पता और जन्मतिथि जैसी संवेदनशील जानकारियों में अवैध बदलाव कराया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए अत्यधिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करता था। बरामद 42 दस्तावेजों में सेना के सेवानिवृत्त पेंशन फॉर्म, गैस कनेक्शन रसीदें और आयु प्रमाण पत्र के डिजिटल टेम्पलेट शामिल हैं। इन टेम्पलेट्स की मदद से नए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे, जिन्हें असली दिखाने के लिए उन पर नकली क्यूआर कोड भी लगाए जाते थे।
सबसे चौंकाने वाला मामला एक 1938 में जन्मी महिला मुन्नी देवी से जुड़ा पाया गया, जिसके नाम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार, ऐसे दस्तावेजों का उपयोग पहचान बदलने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर के लिए किया जा रहा था।
एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि पुलिस को इस अवैध गतिविधि की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद एक डिकॉय ऑपरेशन चलाया गया। एक पुलिसकर्मी को फर्जी ग्राहक बनाकर आधार अपडेट कराने भेजा गया। जब आरोपियों ने बिना वैध दस्तावेजों के ₹4,000 की मांग की, तो सौदा ₹3,000 में तय हुआ। जैसे ही लेनदेन की पुष्टि हुई, पुलिस टीम ने मौके पर छापा मारकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं, क्योंकि यह मामला केवल साइबर धोखाधड़ी तक सीमित नहीं बल्कि राष्ट्रीय पहचान प्रणाली से छेड़छाड़ से जुड़ा हुआ है। आईबी सहित अन्य एजेंसियां अब इस नेटवर्क के संभावित विस्तार और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह के वित्तीय लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और दस्तावेजी हेरफेर की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस फर्जी आधार नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
