इंदौर में कानून छात्र पर इंस्टाग्राम के जरिए AI से बने फर्जी NEET लीक पेपर बेचकर अभ्यर्थियों को गुमराह करने का आरोप लगा है।

NEET-UG 2026 पेपर लीक में बड़ा खुलासा: पेपर-सेटिंग कमेटी की सदस्य मनीषा मंधारे 14 दिन की CBI रिमांड पर

Team The420
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नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महाराष्ट्र के पुणे की वरिष्ठ बॉटनी शिक्षिका और मामले की प्रमुख आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को 14 दिन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) हिरासत में भेज दिया है। CBI ने उन्हें गहन पूछताछ के बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि मंधारे परीक्षा प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़ी थीं और उन्हें प्रश्नपत्रों तक विशेष पहुंच प्राप्त थी।

जांच में सामने आया है कि मनीषा मंधारे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की NEET-UG पेपर-सेटिंग कमेटी का हिस्सा थीं। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसके कारण बॉटनी और जूलॉजी विषयों के प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इसी विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।

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CBI के अनुसार, मंधारे को मुख्य आरोपी प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी और अन्य गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का दावा है कि पूरे नेटवर्क में परीक्षा से जुड़े अंदरूनी लोगों की भूमिका सामने आ रही है, जिन्होंने कथित तौर पर गोपनीय प्रश्नपत्रों का दुरुपयोग किया।

आरोप है कि अप्रैल 2026 के दौरान मनीषा मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर संभावित परीक्षार्थियों को इकट्ठा किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मंधारे ने अपने पुणे स्थित आवास पर कथित तौर पर गुप्त कोचिंग सत्र आयोजित किए, जहां चुनिंदा छात्रों को लीक हुए प्रश्न और उनके उत्तर लिखवाए गए। इसके बदले छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये वसूले जाने का आरोप है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि तीन मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा में वही प्रश्न कथित तौर पर हूबहू पूछे गए, जो इन गुप्त सत्रों में बताए गए थे। इससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रश्नपत्र कितने समय पहले लीक हुआ और किन-किन स्तरों पर इसकी जानकारी साझा की गई।

इस मामले में इससे पहले लातूर से केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी को भी गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुलकर्णी लंबे समय से NEET प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल से जुड़े थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने भी परीक्षा से पहले छात्रों को अपने घर बुलाकर संभावित प्रश्न और उत्तर याद करवाए।

CBI अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों की जांच कर रही है। देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी के दौरान एजेंसियों ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक स्टेटमेंट और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्रों की जानकारी किस माध्यम से साझा की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल सीमित स्तर का पेपर लीक नहीं बल्कि संगठित तरीके से संचालित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोग, बिचौलिए और तकनीकी माध्यम शामिल रहे हों। अधिकारियों के अनुसार, अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर समेत विभिन्न शहरों से कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जांच एजेंसियां अब यह भी जांच कर रही हैं कि क्या अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह का नेटवर्क सक्रिय था। आने वाले दिनों में मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े वित्तीय और तकनीकी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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