इंदौर में कानून छात्र पर इंस्टाग्राम के जरिए AI से बने फर्जी NEET लीक पेपर बेचकर अभ्यर्थियों को गुमराह करने का आरोप लगा है।

27 अप्रैल को ही मिल गए थे NEET के सवाल-जवाब: CBI जांच में अंदरूनी नेटवर्क और ‘स्पेशल क्लास’ मॉडल का खुलासा

Team The420
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नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया है कि मुख्य आरोपियों को परीक्षा से लगभग एक सप्ताह पहले, यानी 27 अप्रैल को ही प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे। एजेंसी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े एक अंदरूनी व्यक्ति की भी भूमिका हो सकती है, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।

CBI के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय वाघमारे ने अन्य आरोपियों और NTA से जुड़े एक कथित “पब्लिक सर्वेंट” के साथ साजिश कर प्रश्नपत्र और उत्तर हासिल किए। एजेंसी का कहना है कि वाघमारे की पहचान केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी के जरिए हुई थी। कुलकर्णी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे को शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

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जांच एजेंसी ने अदालत में पेश केस डायरी में आरोप लगाया कि मनीषा वाघमारे ने प्रोफेसर कुलकर्णी से प्रश्न और उत्तर हासिल किए और बाद में उन्हें अन्य आरोपियों तक पहुंचाया। इनमें अहिल्यानगर से गिरफ्तार धनंजय लोखंडे भी शामिल है, जिस पर आगे प्रश्नपत्र वितरित करने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि यह पूरा काम मोटी रकम लेकर किया गया और कई छात्रों तथा अभिभावकों से लाखों रुपये वसूले गए।

CBI के अनुसार, परीक्षा खत्म होने के बाद कथित तौर पर सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई। जांच में सामने आया है कि प्रोफेसर कुलकर्णी द्वारा छात्रों को दिए गए हस्तलिखित केमिस्ट्री प्रश्नपत्र और नोट्स नष्ट कर दिए गए। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे ने भी परीक्षा के बाद संबंधित दस्तावेज और कागजात कथित तौर पर नष्ट कर दिए ताकि जांच एजेंसियों को कोई सीधा सबूत न मिल सके।

मामले में गिरफ्तार बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे की भूमिका को भी बेहद अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मंधारे NEET-UG पेपर-सेटिंग कमेटी का हिस्सा थीं और उन्हें NTA ने विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि मंधारे को बॉटनी और जूलॉजी प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच प्राप्त थी।

CBI का आरोप है कि अप्रैल 2026 के दौरान मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे की मदद से संभावित परीक्षार्थियों को इकट्ठा किया और अपने आवास पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में कथित तौर पर चुनिंदा छात्रों को लीक प्रश्न और उत्तर लिखवाए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि छात्रों से इसके बदले लाखों रुपये फीस के तौर पर लिए गए।

जांच अधिकारियों के अनुसार, इन विशेष सत्रों में बताए गए अधिकांश प्रश्न तीन मई को आयोजित वास्तविक NEET-UG परीक्षा में हूबहू या काफी हद तक मेल खाते पाए गए। यही तथ्य अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रश्नपत्र कितने स्तरों पर साझा किए गए और क्या इसमें परीक्षा प्रणाली से जुड़े अन्य लोग भी शामिल थे।

इससे पहले गिरफ्तार प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी लंबे समय से NEET प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल से जुड़े रहे थे। CBI का दावा है कि उन्होंने अपने विशेषाधिकार का दुरुपयोग करते हुए अप्रैल के अंतिम सप्ताह में छात्रों को घर बुलाया और संभावित प्रश्न, विकल्प और उत्तर लिखवाए।

NEET-UG 2026 परीक्षा पांच मई को देशभर के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। हालांकि पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। NTA के अनुसार, कथित गड़बड़ी की जानकारी परीक्षा के चार दिन बाद सात मई की शाम को मिली, जिसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।

CBI अब डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। एजेंसी को आशंका है कि यह केवल सीमित स्तर का पेपर लीक नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोग, बिचौलिए और तकनीकी माध्यम शामिल रहे हों।

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