कानपुर में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 45 स्वयं सहायता समूहों पर ₹40 लाख का फंड लेने के बाद गायब होने का आरोप।

चेन्नई ऑफिस में ₹2.2 करोड़ की कथित वित्तीय हेराफेरी: श्रीलंकन एयरलाइंस ने भारतीय कर्मचारियों पर लगाया फंड गबन का आरोप

Team The420
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नई दिल्ली/चेन्नई। श्रीलंकन एयरलाइंस ने अपने चेन्नई स्थित कार्यालय में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद कई भारतीय कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एयरलाइन का दावा है कि चेन्नई कार्यालय के वित्त विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर इनवॉइस, भुगतान विवरण और हस्ताक्षरों में बदलाव कर करीब ₹2.2 करोड़ की रकम का गबन किया। मामले के सामने आने के बाद एयरलाइन ने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क किया है और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

श्रीलंका की राष्ट्रीय एयरलाइन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि चेन्नई कार्यालय में तैनात कुछ भारतीय कर्मचारियों पर लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप है। एयरलाइन के मुताबिक, आरोपियों ने भुगतान प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर अवैध रूप से रकम ट्रांसफर की। हालांकि एयरलाइन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कथित गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी।

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एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक आंतरिक जांच में वित्त विभाग से जुड़े कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए, जिसके बाद विस्तृत ऑडिट कराया गया। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसे मामलों का पता चला, जहां भुगतान से जुड़े इनवॉइस, बैंकिंग विवरण और अधिकृत हस्ताक्षरों में बदलाव किए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की हेराफेरी बिना व्यवस्थित योजना और अंदरूनी पहुंच के संभव नहीं थी।

मामले के सामने आने के बाद एयरलाइन ने भारतीय जांच एजेंसियों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों को औपचारिक शिकायत सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल, ईमेल संचार और भुगतान मंजूरी प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े में बाहरी नेटवर्क या किसी तीसरे पक्ष की भी भूमिका थी।

श्रीलंकन एयरलाइंस ने अपने बयान में एक अन्य साइबर सुरक्षा घटना का भी उल्लेख किया है। एयरलाइन के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित एक सेवा प्रदाता को कथित तौर पर गलत भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि यह घटना एक समझौता किए गए ईमेल अकाउंट (Compromised Email Account) से जुड़ी हो सकती है।

साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट संस्थानों को निशाना बनाकर बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज (BEC), इनवॉइस मैनिपुलेशन और फर्जी भुगतान निर्देशों से जुड़े मामलों में तेजी आई है। इन मामलों में अपराधी अक्सर आधिकारिक ईमेल अकाउंट, सप्लायर कम्युनिकेशन और भुगतान स्वीकृति प्रक्रियाओं में सेंध लगाकर फर्जी ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यदि किसी संगठन के वित्तीय सिस्टम में मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन, डिजिटल ऑडिट ट्रेल और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था कमजोर हो, तो ऐसे मामलों में लंबे समय तक गड़बड़ी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अब साइबर सुरक्षा और वित्तीय अनुपालन केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि रणनीतिक जोखिम प्रबंधन का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मामले में कर्मचारियों की एक्सेस हिस्ट्री, लॉगिन रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर उपयोग, भुगतान अनुमोदन श्रृंखला और बैंक खातों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित फर्जीवाड़ा व्यक्तिगत स्तर पर किया गया था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

कॉरपोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं कंपनियों के भीतर वित्तीय निगरानी और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। खासतौर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे संवेदनशील वित्तीय प्रक्रियाओं में बहुस्तरीय सत्यापन, AI आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली और नियमित साइबर ऑडिट को अनिवार्य बनाएं।

फिलहाल भारतीय जांच एजेंसियां और एयरलाइन की आंतरिक टीमें मामले की बहुस्तरीय जांच में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और वित्तीय लेनदेन, संभावित डिजिटल छेड़छाड़ तथा कथित अंदरूनी भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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