गुवाहाटी। भारत-म्यांमार सीमा के जरिए संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने सिंडिकेट के कथित सरगना थाचिनतुआंग उर्फ चिंतुआंग और त्लुआंगा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय सबसे बड़े ड्रग तस्करों में शामिल था और म्यांमार से मेथामफेटामाइन तथा हेरोइन की सप्लाई संचालित करता था।
NCB के मुताबिक, आरोपी को दिल्ली से विस्तृत निगरानी, खुफिया इनपुट, अंतरराज्यीय समन्वय और लंबे समय तक चलाए गए फॉलो-अप ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि चिंतुआंग म्यांमार-मिजोरम-मणिपुर-असम-त्रिपुरा कॉरिडोर के जरिए बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क भारत के अलावा बांग्लादेश तक फैला हुआ था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी कई NDPS मामलों में वांछित था और उसके खिलाफ NCB सहित विभिन्न ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों में मामले दर्ज थे। अधिकारियों के अनुसार, चिंतुआंग पर मिजोरम के चंफाई पुलिस स्टेशन में 2025 में दर्ज दो मामलों में मेथामफेटामाइन और हेरोइन तस्करी का आरोप है। इसके अलावा 2023 में मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग द्वारा दर्ज छह मामलों में भी उसका नाम सामने आया था।
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NCB का कहना है कि जांच के दौरान आरोपी के नेटवर्क की अनुमानित अवैध गतिविधियां करीब ₹115 करोड़ से जुड़ी पाई गईं। एजेंसियों के मुताबिक, उसका संबंध म्यांमार-मिजोरम-त्रिपुरा/असम कॉरिडोर से जुड़े सात मामलों और म्यांमार-मणिपुर-असम मार्ग से जुड़े पांच अन्य मामलों से भी पाया गया है।
चिंतुआंग को 2024 के एक बड़े NCB अगरतला जोन मामले में मुख्य आरोपी बताया गया है, जिसमें 14 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 2.8 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। वहीं 2025 के एक अन्य मामले में 49.1 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद की गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में पहले ही नौ तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
जांच एजेंसियों ने सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य सदस्यों और करीबी सहयोगियों की भी पहचान की है। इनमें वुंगखानथावना नामक आरोपी को नेटवर्क का अहम फेसीलिटेटर बताया गया है, जो मादक पदार्थों की खेप की आवाजाही और डिलीवरी समन्वय में भूमिका निभा रहा था। उसे फॉलो-अप ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, वह मिजोरम पुलिस के एक अन्य NDPS मामले में भी शामिल पाया गया, जिसके बाद उसके खिलाफ PITNDPS कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
जांच में एक अन्य महिला सहयोगी लालरामपरी की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसियों का दावा है कि वह नेटवर्क के लिए हवाला ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही थी और ड्रग तस्करी से हासिल रकम को विभिन्न चैनलों के जरिए ट्रांसफर करती थी। NCB ने उसे अगस्त 2024 में गिरफ्तार किया था। जांच में करीब ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ, जिसके बाद मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी सौंपा गया। अधिकारियों ने संदिग्ध संपत्तियों और बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई शुरू की है।
इसके अलावा नवंबर 2025 में दक्षिण असम के कछार से अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था, जिसे नेटवर्क का प्रमुख भारतीय ऑपरेटिव और लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेटर बताया गया। वहीं दिसंबर 2025 में करीमगंज निवासी जबरुल को अतिरिक्त मादक पदार्थों की खेप के साथ पकड़ा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों आरोपी अंतरराज्यीय तस्करी और ड्रग मूवमेंट समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
NCB ने कहा है कि ड्रग नेटवर्क की आर्थिक संरचना को तोड़ने के लिए “360 डिग्री वित्तीय जांच” चलाई जा रही है। एजेंसियां बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं ताकि मादक पदार्थ तस्करी से अर्जित संपत्तियों को जब्त किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क स्थानीय सप्लायर, हवाला चैनल, ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर और सीमा पार संपर्कों की मदद से संचालित हो रहा था, जिसकी जांच अभी जारी है।
