वॉशिंगटन। अमेरिका में इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने लगभग 10,000 विदेशी छात्रों की पहचान की है, जिनमें कई भारतीय छात्र भी शामिल हैं। इन छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने Optional Practical Training (OPT) प्रोग्राम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी नौकरी और संदिग्ध नियोक्ताओं के साथ रोजगार संबंध दिखाए।
यह खुलासा ICE के एक्टिंग डायरेक्टर टॉड लायंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। उन्होंने कहा कि OPT प्रोग्राम “फ्रॉड का केंद्र” बनता जा रहा है और इस मामले में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने कई स्तरों पर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान की गई ऑन-ग्राउंड साइट इंस्पेक्शन में यह सामने आया कि कई OPT लाभार्थियों का “मैनेजमेंट” भारत में बैठे व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। यह व्यवस्था प्रोग्राम के नियमों का उल्लंघन मानी जा रही है, क्योंकि इसके तहत ट्रेनिंग और सुपरविजन अमेरिका के भीतर से होना अनिवार्य है।
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टॉड लायंस ने कहा कि जांच में कई गंभीर मामलों के संकेत मिले हैं, जिनमें केवल वीजा नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में छात्र नेटवर्क के जरिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी चोरी, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियाँ और बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले स्कैम तक सामने आए हैं।
ICE ने इस पूरे अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए कहा है कि विदेशी छात्रों के नाम पर किसी भी प्रकार के खतरे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एजेंसी का कहना है कि यह मामला केवल इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि OPT प्रोग्राम धीरे-धीरे एक “अनियंत्रित वर्क सिस्टम” में बदल गया है, जहां बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अमेरिका में काम कर रहे हैं। लायंस के अनुसार, प्रोग्राम के विस्तार के साथ-साथ इसमें धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।
OPT प्रोग्राम विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद 12 महीने तक काम करने की अनुमति देता है। STEM क्षेत्रों में यह अवधि 24 महीने तक बढ़ाई जा सकती है। यह व्यवस्था अक्सर H-1B वीजा की ओर जाने का एक रास्ता भी मानी जाती है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप जरूरी होती है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे सिस्टम में फर्जी नियोक्ताओं की भूमिका भी सामने आ रही है, जहां कागजों पर नौकरी दिखाई जाती है लेकिन वास्तविक काम और सुपरविजन कहीं और से संचालित होता है। इसी वजह से कई मामलों में भारत से ऑपरेशन और मैनेजमेंट की बात सामने आई है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई आगे और तेज की जाएगी और संदिग्ध मामलों की गहन जांच होगी। अधिकारियों के अनुसार, कई छात्रों के दस्तावेज, रोजगार रिकॉर्ड और नियोक्ता डिटेल्स की समीक्षा की जा रही है।
इस कार्रवाई का असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि OPT प्रोग्राम में भारतीय छात्र सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। आने वाले समय में कंप्लायंस और वेरिफिकेशन नियम और सख्त किए जा सकते हैं।
फिलहाल जांच जारी है और ICE ने संकेत दिए हैं कि यह मामला केवल शुरुआती चरण में है तथा आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
