बिहार के बेगूसराय जिले में साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने और उसे ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि पिछले आठ महीनों के दौरान इस खाते से ₹15.25 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन किए गए।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान फुलवरिया थाना क्षेत्र निवासी सुनील कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर साइबर ठगों को अपना बैंक खाता उपयोग करने की अनुमति दी थी, जिसके जरिए देशभर में ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और रूट किया जाता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला साइबर पुलिस को एक स्थानीय एसबीआई शाखा में संचालित बचत खाते में असामान्य वित्तीय गतिविधियों की सूचना मिली। इसके बाद साइबर पुलिस और जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से खाते की जांच शुरू की। रिकॉर्ड खंगालने पर बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन सामने आए, जिसके बाद आरोपी तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
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जांच अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस बैंक खाते से जुड़े कुल 205 शिकायतें दर्ज मिली हैं। ये शिकायतें देश के विभिन्न राज्यों से दर्ज कराई गई थीं, जिससे अंदेशा है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़ा हो सकता है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पैसों के बदले अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था। आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि इसके बदले उसे ₹3.75 लाख दिए गए थे। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी लंबे समय से साइबर गिरोह के संपर्क में था और खाते का इस्तेमाल लगातार फर्जी ट्रांजैक्शन के लिए किया जा रहा था।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ‘म्यूल अकाउंट’ साइबर अपराधों में एक अहम कड़ी बन चुके हैं। ऐसे खातों का उपयोग ठगी से हासिल रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और असली अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाते के असली धारक को सीमित कमीशन देकर पूरे नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता है।
महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामलों में “renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh” पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का इस्तेमाल कर आम लोगों के खातों को अवैध लेनदेन के लिए उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोग लालच में आकर अपने खाते, सिम कार्ड या डिजिटल पहचान साझा करते हैं, जो बाद में बड़े साइबर अपराधों का माध्यम बन जाते हैं।
जांच के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर तीन अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि संगठित साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बेगूसराय साइबर थाना में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना समझी जा सके।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, डेबिट कार्ड, ओटीपी या नेट बैंकिंग जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मामूली रकम के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराना गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
