मुंबई के कल्याण में PPO नंबर सत्यापन के बहाने रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से ₹7 लाख की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

पंजाब में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: लुधियाना में 136 गिरफ्तार, विदेशी ठगी ऑपरेशन का खुलासा

Team The420
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लुधियाना। पंजाब के लुधियाना में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए बड़े अभियान में पुलिस ने कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 136 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह ऑनलाइन ठगी, फर्जी तकनीकी सहायता योजनाओं, निवेश धोखाधड़ी और डिजिटल भुगतान फ्रॉड के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। कार्रवाई को हाल के वर्षों में राज्य की सबसे बड़ी साइबर अपराध विरोधी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को लंबे समय से शहर और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे संदिग्ध कॉल सेंटरों और असामान्य डिजिटल वित्तीय गतिविधियों के बारे में इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद तकनीकी निगरानी, डिजिटल सर्विलांस और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जहां से बड़ी संख्या में संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों से फोन कॉल, ईमेल और ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करते थे। कई मामलों में आरोपी खुद को बैंक अधिकारी, तकनीकी सहायता एजेंट, निवेश सलाहकार या सरकारी प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। इसके बाद पीड़ितों से बैंकिंग जानकारी, डेबिट कार्ड डिटेल, ओटीपी और डिजिटल भुगतान हासिल किए जाते थे।

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अधिकारियों के अनुसार पूरा ऑपरेशन सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों पर आधारित था, जिसमें लोगों के बीच डर, जल्दबाजी या भरोसे का माहौल बनाकर उन्हें ठगी का शिकार बनाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि पीड़ितों को फर्जी वेबसाइट, कॉल मास्किंग तकनीक और पेशेवर स्क्रिप्ट के जरिए भ्रमित किया जाता था ताकि उन्हें असली और नकली सेवा में फर्क समझ न आए।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस, सिम कार्ड, हार्ड डिस्क और संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से विदेशी नागरिकों से जुड़े डेटा और ऑनलाइन लेनदेन के रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई है। साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ अब इन डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि की जा सके।

सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कॉल ऑपरेटर, तकनीकी सहायता स्टाफ, बैंक खातों का प्रबंधन करने वाले लोग और डिजिटल भुगतान संभालने वाले सदस्य शामिल हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क अलग-अलग स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें कुछ लोग डेटा जुटाने, कुछ विदेशी नंबरों पर कॉल करने और कुछ अवैध रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने का काम करते थे।

महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामलों में प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी कॉल सेंटर और डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का संगठित तरीके से दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अपराधी भरोसा जीतने के लिए नकली वेबसाइट, कॉल मास्किंग और तकनीकी सहायता के नाम पर लोगों को भ्रमित करते हैं।

प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क कई देशों में सक्रिय साइबर ठगी मॉड्यूल से जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब बैंक खातों, आईपी एड्रेस, इंटरनेट लॉग, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय भुगतान चैनलों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि अवैध रकम को कई बैंक खातों और तथाकथित “म्यूल अकाउंट” के जरिए घुमाया जाता था ताकि असली संचालकों की पहचान छिपाई जा सके। कई संदिग्ध लेनदेन की जानकारी संबंधित वित्तीय एजेंसियों और बैंकों के साथ साझा की गई है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक, निवेश प्रस्ताव या तकनीकी सहायता दावे पर तुरंत भरोसा न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक तकनीकों और मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी तथा बड़े वित्तीय खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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