खम्मम। तेलंगाना के खम्मम साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया और यूट्यूब प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को तेजी से मुनाफा कमाने का लालच देता था और कथित फर्जी निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करता था। प्रारंभिक जांच में लगभग ₹1 करोड़ की ऑनलाइन ठगी के संकेत मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के मोगलथुर निवासी 23 वर्षीय कडाली चंद्रशेखर के रूप में हुई है। साइबर पुलिस ने उसे उसके गृह क्षेत्र से हिरासत में लेकर खम्मम लाया, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की गहन जांच जारी है।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब एक महिला सरकारी कर्मचारी ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर उससे लगभग ₹13 लाख की ठगी की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रचार सामग्री के जरिए भरोसे में लिया गया था। इसके बाद उसे कथित तौर पर ऐसे निवेश विकल्प दिखाए गए जिनमें कम समय में भारी रिटर्न का दावा किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी कथित तौर पर अपने यूट्यूब चैनल पर वीडियो पोस्ट करता था, जिनमें ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश योजनाओं और तेजी से आर्थिक लाभ कमाने के दावे किए जाते थे। पुलिस का कहना है कि इन वीडियो और डिजिटल प्रचार सामग्री के जरिए लोगों को आकर्षित कर निवेश कराने का प्रयास किया जाता था। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोगों ने ऊंचे मुनाफे की उम्मीद में रकम ट्रांसफर की थी।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आरोपी के बैंकिंग ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को शक है कि मामले में कई बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क सक्रिय था।
महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामलों में renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो कंटेंट और फर्जी निवेश सलाह का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि अपराधी भरोसा जीतने के लिए प्रोफेशनल प्रस्तुति, नकली सफलता की कहानियां और हाई-रिटर्न के झूठे दावे करते हैं, जिससे लोग आसानी से जाल में फंस जाते हैं।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश फ्रॉड के मामलों में अपराधी अक्सर शुरुआती चरण में छोटे मुनाफे दिखाकर पीड़ितों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में फर्जी ऐप, नकली डैशबोर्ड और मनगढ़ंत ट्रेडिंग रिपोर्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि निवेश असली लगे।
पुलिस अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, यूट्यूब चैनल, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितने लोग इस कथित ठगी का शिकार हुए और रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित ठगी में इस्तेमाल किए गए कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंक खाते अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस संबंध में संबंधित बैंकों और तकनीकी एजेंसियों से जानकारी मांगी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने किसी संगठित निवेश फ्रॉड नेटवर्क के साथ मिलकर काम किया।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया, यूट्यूब वीडियो या ऑनलाइन विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले हाई-रिटर्न निवेश दावों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म, कंपनी और वित्तीय वैधता की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और डिजिटल साक्ष्य तथा संभावित पीड़ितों की पहचान होने की संभावना जताई जा रही है।
