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₹150 करोड़ ‘पीज’ आयात घोटाला केस में राहत: पनवेल कोर्ट ने आयातक को दी जमानत

Team The420
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मुंबई। महाराष्ट्र के पनवेल स्थित एक अदालत ने कथित ₹150 करोड़ आयात धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किए गए आयातक परेशकुमार दिनसुखराय रायथाठा को जमानत दे दी है। मामला कथित तौर पर “ग्रीन पीज” और “मेलन सीड्स” जैसे प्रतिबंधित आयातित सामान को “पिजन पीज” घोषित कर आयात नियमों से बचने से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए विदेशी व्यापार नियमों और आयात प्रतिबंधों को दरकिनार किया गया।

मामले की जांच राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) कर रहा है। एजेंसी के अनुसार आरोपी एम/एस आरडी इंटरनेशनल नामक फर्म का संचालक है और उसे 19 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि कई प्रतिबंधित या नियंत्रित श्रेणी के आयातित सामान को दस्तावेजों में अलग नाम देकर भारतीय बाजार में लाने की कोशिश की गई।

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जांच अधिकारियों का दावा है कि कथित नेटवर्क ने Directorate General of Foreign Trade (DGFT) की अधिसूचनाओं और Foreign Trade (Development and Regulation) Act के प्रावधानों से बचने के लिए सामान की प्रकृति और श्रेणी को गलत तरीके से घोषित किया। आरोप है कि “मेलन सीड्स” और “ग्रीन पीज” को दस्तावेजों में सामान्य “पीज” या “पिजन पीज” दिखाया गया ताकि आयात प्रतिबंधों और लाइसेंस संबंधी नियमों से बचा जा सके।

सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को शक है कि पूरे ऑपरेशन में कई कंपनियों और Importer-Exporter Codes (IEC) का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि अलग-अलग फर्मों के नाम पर आयात बुक कर वास्तविक स्वामित्व और नियंत्रण को छिपाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान एजेंसियों ने अदालत को बताया कि कुछ कंसाइनमेंट पहले आरडी इंटरनेशनल के नाम पर बुक किए गए और बाद में अन्य कंपनियों के नाम पर स्थानांतरित कर दिए गए।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामला अभी जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और कथित सिंडिकेट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ बाकी है। जांच एजेंसियों ने यह आशंका भी जताई कि आरोपी को रिहा किए जाने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।

वहीं आरोपी की ओर से पेश पक्ष ने अदालत में कहा कि वह फरवरी से ही जांच में सहयोग कर रहा था और कई बार DRI अधिकारियों के सामने उपस्थित भी हुआ। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जांच एजेंसी पहले ही संबंधित कंसाइनमेंट जब्त कर चुकी है तथा सभी आवश्यक दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अपने कब्जे में ले चुकी है, जिनमें लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

बचाव पक्ष ने अदालत के सामने कुछ ऐसे “नो ऑब्जेक्शन” पत्रों का भी उल्लेख किया, जो कथित तौर पर DRI द्वारा कुछ कंसाइनमेंट के संबंध में जारी किए गए थे। इन दस्तावेजों में यह कहा गया था कि संबंधित कंटेनरों में कोई छिपा हुआ या गलत घोषित सामान नहीं मिला। इसके अलावा बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने सीमा शुल्क का भुगतान किया था और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.आर. उगाले ने 15 मई को पारित आदेश में कहा कि आरोपी के आवास से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद नहीं हुए हैं। अदालत ने यह भी माना कि मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, जो पहले से ही DRI के कब्जे में हैं। इसी आधार पर अदालत ने माना कि आगे की हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है।

हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी को तय अवधि तक नियमित रूप से DRI कार्यालय में उपस्थित होना होगा। इसके अलावा उसे अपना पासपोर्ट जमा कराने और किसी भी गवाह को प्रभावित न करने के निर्देश दिए गए हैं।

महत्वपूर्ण आर्थिक अपराध मामलों में renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि संगठित आर्थिक और व्यापारिक धोखाधड़ी में अब फर्जी दस्तावेज, बहु-स्तरीय कंपनियां और डिजिटल रिकॉर्ड मैनेजमेंट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में वित्तीय ट्रेल और दस्तावेजी विश्लेषण जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां कथित आयात नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही हैं।

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