भारत ने साइबर फ्रॉड और म्यूल अकाउंट नेटवर्क की पहचान के लिए AI आधारित MuleHunter.ai सिस्टम लॉन्च किया।

साइबर फ्रॉड पर डिजिटल वार: भारत ने लॉन्च किया AI सिस्टम ‘MuleHunter.ai’, म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर लगेगी लगाम

Team The420
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नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के खिलाफ सरकार ने एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) की साझेदारी से तैयार किया गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम ‘MuleHunter.ai’ अब डिजिटल वित्तीय सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनने जा रहा है। इस सिस्टम का उद्देश्य उन बैंक खातों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध धन को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।

अधिकारियों के अनुसार यह सिस्टम खास तौर पर “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क पर नजर रखने के लिए डिजाइन किया गया है, जो साइबर ठगी की सबसे बड़ी कड़ी मानी जाती है। इन खातों के जरिए अपराधी अलग-अलग स्तरों पर पैसे को घुमाकर उसके स्रोत को छिपाते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।

सूत्रों के मुताबिक MuleHunter.ai मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एल्गोरिदम का उपयोग करता है, जो बैंकिंग लेनदेन के पैटर्न का रियल-टाइम विश्लेषण करता है। सिस्टम यह पहचानने में सक्षम है कि किसी खाते में अचानक बार-बार पैसे का आना-जाना, तेज ट्रांजैक्शन या असामान्य वित्तीय गतिविधि हो रही है या नहीं।

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अधिकारियों ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय स्तर के डाटाबेस और साइबर इंटेलिजेंस नेटवर्क से जुड़ा होगा, जिससे संदिग्ध खातों की पहचान और उन्हें तुरंत फ्लैग करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी। इससे बैंक और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और बड़े वित्तीय नुकसान को रोका जा सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डिजिटल पेमेंट और यूपीआई सिस्टम के विस्तार के साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फर्जी लोन एप, फिशिंग अटैक और पहचान की चोरी जैसे मामलों ने आम नागरिकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

सरकार पहले से ही साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है, जिनमें जागरूकता अभियान, केंद्रीकृत शिकायत पोर्टल और बैंकिंग संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय शामिल है। अब AI आधारित यह नया सिस्टम इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक अभी परीक्षण और पायलट चरण में है, जिसे शुरुआती तौर पर कुछ चयनित बैंकिंग नेटवर्क में लागू किया जाएगा। इसके प्रदर्शन और सटीकता के आधार पर इसे धीरे-धीरे पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा।

MuleHunter.ai की खासियत यह है कि यह केवल एक खाते को संदिग्ध नहीं बताता, बल्कि पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश करता है। इसमें यह देखा जाता है कि कौन से खाते आपस में जुड़े हुए हैं और किस तरह से पैसे को एक जगह से दूसरी जगह घुमाया जा रहा है।

इस पहल पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी तथा प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ प्रो. Triveni Singh ने कहा कि ऐसे AI आधारित सिस्टम “डिजिटल वित्तीय सुरक्षा में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं”, क्योंकि साइबर अपराधी अब सिर्फ एक खाते या एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को जोड़कर ठगी करते हैं। उन्होंने कहा कि म्यूल अकाउंट्स की पहचान जितनी जल्दी होगी, उतनी ही तेजी से संगठित साइबर नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीक के साथ-साथ नागरिक जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकें भविष्य में साइबर अपराधियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं, क्योंकि इससे उनकी छिपने की रणनीतियां कमजोर पड़ेंगी। हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि सिस्टम को अत्यधिक सटीक और संतुलित बनाना जरूरी है, ताकि सामान्य उपयोगकर्ताओं पर अनावश्यक असर न पड़े।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि तकनीक के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि कई साइबर फ्रॉड मामलों में लोग डर या भ्रम में आकर खुद ही धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।

सरकार का मानना है कि AI, डेटा एनालिटिक्स और बैंकिंग सिस्टम के बीच मजबूत तालमेल से भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए सीमा पार साइबर नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है।

फिलहाल, MuleHunter.ai को भारत की डिजिटल सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो देश को साइबर अपराध के खिलाफ अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में आगे ले जा सकता है।

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