हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक बड़े वित्तीय घोटाले ने कारोबारी हलकों में हलचल मचा दी है। साइबराबाद आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बिजनेसमैन गज्जाला योगानंद के खिलाफ ₹24.53 करोड़ की कथित धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। यह मामला अमेरिका में रहने वाले एक NRI कारोबारी पवन कुमार नल्लमाला की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता पवन कुमार, जो मूल रूप से हैदराबाद के निज़ामपेट क्षेत्र के रहने वाले हैं और वर्तमान में अमेरिका में व्यवसाय करते हैं, ने आरोप लगाया है कि उन्हें होटल और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के नाम पर लंबे समय तक गुमराह किया गया और करोड़ों रुपये विभिन्न बैंकिंग माध्यमों से ट्रांसफर कराए गए।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2019 से 2024 के बीच का है, जब गज्जाला योगानंद ने कथित तौर पर निवेशक को अपनी कंपनियों में साझेदारी और शेयर देने का आश्वासन देकर निवेश के लिए प्रेरित किया। इनमें मंजीरा होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित संस्थाएं शामिल बताई जा रही हैं।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
शिकायत में कहा गया है कि शुरुआती भरोसे के बाद निवेशक ने विभिन्न चरणों में कुल ₹24.53 करोड़ की राशि ट्रांसफर की, लेकिन लंबे समय तक न तो उन्हें कंपनी में हिस्सेदारी दी गई और न ही किसी तरह के शेयर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। लगातार पूछताछ के बाद नवंबर 2024 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें शेयर ट्रांसफर का वादा दोहराया गया, लेकिन उस पर भी अमल नहीं हुआ।
मामले में यह भी आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई, तो सामने आया कि जिन शेयरों का वादा किया गया था, वे पहले से ही टूरिज्म फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (TFCI) के पास गिरवी रखे जा चुके थे। इस जानकारी को कथित रूप से निवेशक से छिपाया गया।
शिकायत के अनुसार, फरवरी 2026 में आरोपी की ओर से निवेशक पर दबाव डालकर नए शर्तों के साथ एक और MoU पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की गई, और मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
इस मामले में साइबराबाद EOW ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन, कंपनी दस्तावेजों, समझौता पत्रों और शेयर गिरवी रखने से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही हैं।
गज्जाला योगानंद मंजीरा कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बताए जाते हैं और तेलंगाना के कारोबारी क्षेत्र में उनकी पहचान एक प्रमुख रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी प्रमोटर के रूप में रही है। वे लंबे समय से निर्माण और होटल उद्योग से जुड़े व्यावसायिक नेटवर्क का संचालन करते रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब उनके परिवार या कंपनी समूह पर कानूनी कार्रवाई हुई हो। फरवरी 2024 में उनके पुत्र समेत कई लोगों को कथित नशीले पदार्थों के सेवन के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिससे पहले भी समूह विवादों में रहा है।
मामले ने अब कारोबारी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर निवेश, विदेश में रहने वाले नागरिक और बहु-वर्षीय वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हाई-वैल्यू निवेश विवादों में पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के वित्तीय विवादों और अंतरराष्ट्रीय निवेश धोखाधड़ी के मामलों को रोका जा सके।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी तथा प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ प्रो. Triveni Singh के अनुसार, ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती “भरोसे के आधार पर होने वाले निवेश और जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं” की होती है। उन्होंने कहा कि जब निवेशक लंबी अवधि के वादों पर भरोसा करते हैं, तो कई बार फंड का उपयोग और एसेट्स की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती, जिससे धोखाधड़ी के मामले बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत ड्यू डिलिजेंस और रियल-टाइम निगरानी ही ऐसे मामलों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
फिलहाल EOW की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और वित्तीय दस्तावेजों और गवाहों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
