नवसारी में नकली सोने के आभूषणों को असली बताकर Bank of Baroda शाखा से गोल्ड लोन लेने का मामला सामने आया।

नकली सोने पर गोल्ड लोन का बड़ा खेल: बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में ₹18.49 लाख की ठगी, वेल्यूअर समेत 5 पर केस दर्ज

Team The420
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नवसारी। दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले में बैंकिंग व्यवस्था को हिला देने वाला गोल्ड लोन घोटाला सामने आया है, जिसमें फर्जी सोने के आभूषणों के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा की जलालपोर शाखा से लाखों रुपये की लोन राशि हड़पने का मामला उजागर हुआ है। इस पूरे मामले में चार लोनधारकों और बैंक के अधिकृत गोल्ड वेल्यूअर की मिलीभगत सामने आने के बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में जलालपोर शाखा में चार ग्राहकों ने गोल्ड लोन के लिए आवेदन किया था। इनमें राजेश गोविंद परमार (विजलपोर, नवसारी), सुरेश कवर्धारी यादव (विजलपोर रोड, नवसारी), मौलिक ठाकोर टंडेल (जाहांगीरपुरा, सूरत) और रामसिंग जगदीश निर्मल (घेलखड़ी, नवसारी) शामिल हैं। इन सभी ने कथित तौर पर सोने के आभूषण जमा कर लोन की प्रक्रिया पूरी करवाई।

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बैंक की प्रक्रिया के तहत आभूषणों का मूल्यांकन अधिकृत गोल्ड वेल्यूअर जितेंद्रकुमार धनजी कोराट द्वारा किया गया। आरोप है कि वेल्यूअर ने इन आभूषणों को असली सोना बताते हुए फर्जी मूल्यांकन प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिसके आधार पर तत्कालीन शाखा प्रबंधन ने कुल 535.03 ग्राम सोने के बदले ₹18,49,500 की गोल्ड लोन राशि स्वीकृत कर दी।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब दिसंबर 2022 में क्षेत्रीय कार्यालय के निर्देश पर लोन खातों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया। इस दौरान क्षेत्रीय वेल्यूअर द्वारा प्राथमिक जांच में ही संदेह जताया गया कि आभूषण असली सोने के नहीं हैं। इसके बाद विस्तृत जांच के लिए स्थानीय परीक्षण प्रयोगशाला में नमूने भेजे गए, जहां रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।

लैब रिपोर्ट के अनुसार आभूषणों में सोना नहीं पाया गया, बल्कि उनमें चांदी, तांबा, जस्ता, सीसा और निकेल जैसी धातुओं का मिश्रण था। ऊपर से केवल सोने की परत चढ़ाकर 22 कैरेट 916 हॉलमार्क की नकली मोहर लगाई गई थी। इस खुलासे के बाद बैंक प्रशासन के होश उड़ गए।

बाद में बैंक की ओर से सभी लोनधारकों और वेल्यूअर को कई बार नोटिस जारी कर राशि जमा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन अधिकांश आरोपियों ने भुगतान नहीं किया। केवल राजेश परमार ने ₹2 लाख की आंशिक राशि जमा कराई, जबकि बाकी आरोपियों ने अब तक कोई भुगतान नहीं किया है। वर्तमान में ब्याज और अन्य शुल्क जोड़ने के बाद बैंक की कुल बकाया राशि ₹21,39,256 तक पहुंच चुकी है।

इस पूरे प्रकरण में बैंक ऑफ बड़ौदा की जलालपोर शाखा के वर्तमान प्रबंधक द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभी आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से बैंक को धोखा देने की साजिश रची और फर्जी सोने के आधार पर लोन प्राप्त किया।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस घोटाले में बैंक के किसी अन्य कर्मचारी या बाहरी नेटवर्क की भी भूमिका रही है।

फिलहाल मामला बैंकिंग सिस्टम की आंतरिक निगरानी और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

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